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Sampoornand News:प्राकृतिक चिकित्सा और योग का केंद्र बनेगा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय प्राच्य विद्या के बाद अब प्राकृतिक चिकित्सा और योग का नया केंद्र बनेगा। देश भर के सभी राज्यों में तीन वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम को एक साथ लागू किया जाएगा। आयुर्वेद के विशेषज्ञों से परामर्श के आधार पर इस पाठ्यक्रम को तैयार किया गया है। जल्द ही विश्वविद्यालय में इसकी शुरुआत होगी।
सांख्ययोगतंत्रागम विभाग में प्राकृतिक चिकित्सा व योग में तीन वर्षीय डिग्री डिग्री पाठ्यक्रम शुरू होने जा रहा है। विश्वविद्यालय सहित देश भर के राज्यों में शुरू होने वाला पाठ्यक्रम आयुष मंत्रालय, श्रीमोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग विज्ञान संस्थान, परिवार कल्याण मंत्रालय और आयुष विभाग के पाठ्यक्रम और निर्देशों पर आधारित है। इसमें साध्य और असाध्य दोनों रोगों की चिकित्सा आयुर्वेदोक्त सूत्र सिद्धांत, प्राकृतिक वनस्पतियों और संक्षिप्त क्रिया योगों पर आधारित चिकित्सा पद्धति है। विभागाध्यक्ष प्रो. राघवेंद्र जी दुबे ने बताया कि यह पाठ्यक्रम जल्द ही देश भर के सभी राज्यों में लागू किया जाना प्रस्तावित है। पाठ्यक्रम के अध्ययन के पश्चात समाज में प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से रोगों का निदान संभव हो सकेगा। सरकार की नई चिकित्सा पद्धति के अंतर्गत समाज में आरोग्यता, डॉक्टरों के अभाव और महंगी चिकित्सा पद्धति को ध्यान में रखते हुए इस पाठ्यक्रम को तैयार किया गया है।
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सांख्ययोगतंत्रागम विभाग में प्राकृतिक चिकित्सा व योग में तीन वर्षीय डिग्री डिग्री पाठ्यक्रम शुरू होने जा रहा है। विश्वविद्यालय सहित देश भर के राज्यों में शुरू होने वाला पाठ्यक्रम आयुष मंत्रालय, श्रीमोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग विज्ञान संस्थान, परिवार कल्याण मंत्रालय और आयुष विभाग के पाठ्यक्रम और निर्देशों पर आधारित है। इसमें साध्य और असाध्य दोनों रोगों की चिकित्सा आयुर्वेदोक्त सूत्र सिद्धांत, प्राकृतिक वनस्पतियों और संक्षिप्त क्रिया योगों पर आधारित चिकित्सा पद्धति है। विभागाध्यक्ष प्रो. राघवेंद्र जी दुबे ने बताया कि यह पाठ्यक्रम जल्द ही देश भर के सभी राज्यों में लागू किया जाना प्रस्तावित है। पाठ्यक्रम के अध्ययन के पश्चात समाज में प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से रोगों का निदान संभव हो सकेगा। सरकार की नई चिकित्सा पद्धति के अंतर्गत समाज में आरोग्यता, डॉक्टरों के अभाव और महंगी चिकित्सा पद्धति को ध्यान में रखते हुए इस पाठ्यक्रम को तैयार किया गया है।
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