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Varanasi News: सीएम के बयान के समर्थन में काशी के संत
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से ज्ञानवापी पर दिए गए बयान का संत समाज ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी को मस्जिद कहना जायज नहीं है। वह मंदिर है। इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है।
काशी और मथुरा सहर्ष लौटाएं
उर्दू, फारसी किसी भी भाषा में ज्ञानवापी शब्द नहीं है। ज्ञानवापी का मतलब ज्ञान और वापी का अर्थ ज्ञान रूपी कुआं है, इसलिए इसे हिंदू पक्ष को सौंप देना चाहिए। मुस्लिम समाज को वार्ता की मेज पर बैठकर काशी और मथुरा सहर्ष हिंदुओं को लौटाना चाहिए।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, महामंत्री, अखिल भारतीय संत समिति
सच झुठलाया नहीं जा सकता
ज्ञानवापी का सच झुठलाया नहीं जा सकता है। हर चिन्ह व निशान से पता लगता कि यह मंदिर रहा है। काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर हैं। यह सभी द्वादश ज्योर्लिंग से अलग हैं। यही उनका स्थान है।
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आशुतोषानंद महाराज, महामंडलेश्वर कैलाश मठ
विवाद नहीं, संवाद के जरिये करें पहल
वर्तमान देश की स्थिति में सबका साथ सबके विकास की गंगा बह रही है। मुस्लिम समाज को संवाद के जरिये पहल करनी चाहिए। इससे भारत में एकता और गंगा जमुनी तहजीब का संदेश जाएगा।
संतोष दास, महामंडलेश्वर, सतुआ बाबा आश्रम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो कहा है, वही सच है। अगर कोई दृष्टिबाधित भी दीवारों को टटोल करके देखेगा तो वह बता देगा कि ज्ञानवापी मंदिर है। - महंत बालक दास, पीठाधीश्वर, पातालपुरी
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सत्य और तथ्य के आधार पर दिया बयान
मुख्यमंत्री ने किसी राजनैतिक बल के आधार पर नहीं, सत्य और तथ्य के आधार पर बयान दिया है। व्यर्थ का विवाद किया जा रहा है। ऊपरी ढांचे को बदलकर इसे मस्जिद बनाया गया। उसका अधोभाग है और मध्य भाग मंदिर की तरह जस का तस है। मुस्लिम पक्ष में जो शांति के पक्षधर हों, विचारक हों। उनको आगे आकर न्यायालय और समाज में स्वीकार करना चाहिए कि यह मंदिर था। प्रो. नागेंद्र पांडेय, अध्यक्ष, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास
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काशी और मथुरा सहर्ष लौटाएं
उर्दू, फारसी किसी भी भाषा में ज्ञानवापी शब्द नहीं है। ज्ञानवापी का मतलब ज्ञान और वापी का अर्थ ज्ञान रूपी कुआं है, इसलिए इसे हिंदू पक्ष को सौंप देना चाहिए। मुस्लिम समाज को वार्ता की मेज पर बैठकर काशी और मथुरा सहर्ष हिंदुओं को लौटाना चाहिए।
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स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, महामंत्री, अखिल भारतीय संत समिति
सच झुठलाया नहीं जा सकता
ज्ञानवापी का सच झुठलाया नहीं जा सकता है। हर चिन्ह व निशान से पता लगता कि यह मंदिर रहा है। काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर हैं। यह सभी द्वादश ज्योर्लिंग से अलग हैं। यही उनका स्थान है।
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आशुतोषानंद महाराज, महामंडलेश्वर कैलाश मठ
विवाद नहीं, संवाद के जरिये करें पहल
वर्तमान देश की स्थिति में सबका साथ सबके विकास की गंगा बह रही है। मुस्लिम समाज को संवाद के जरिये पहल करनी चाहिए। इससे भारत में एकता और गंगा जमुनी तहजीब का संदेश जाएगा।
संतोष दास, महामंडलेश्वर, सतुआ बाबा आश्रम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो कहा है, वही सच है। अगर कोई दृष्टिबाधित भी दीवारों को टटोल करके देखेगा तो वह बता देगा कि ज्ञानवापी मंदिर है। - महंत बालक दास, पीठाधीश्वर, पातालपुरी
सत्य और तथ्य के आधार पर दिया बयान
मुख्यमंत्री ने किसी राजनैतिक बल के आधार पर नहीं, सत्य और तथ्य के आधार पर बयान दिया है। व्यर्थ का विवाद किया जा रहा है। ऊपरी ढांचे को बदलकर इसे मस्जिद बनाया गया। उसका अधोभाग है और मध्य भाग मंदिर की तरह जस का तस है। मुस्लिम पक्ष में जो शांति के पक्षधर हों, विचारक हों। उनको आगे आकर न्यायालय और समाज में स्वीकार करना चाहिए कि यह मंदिर था। प्रो. नागेंद्र पांडेय, अध्यक्ष, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास