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Varanasi News : संत रविदास को समाज के लिए बताया प्रेरणा स्त्रोत, राजघाट स्थित मंदिर से रैदासियों का संदेश
Tue, 11 Feb 2025 07:22 PM IST
नितीश कुमार पांडेय
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: नितीश कुमार पांडेय
Updated Tue, 11 Feb 2025 07:22 PM IST
सार
रविदास जयंति की पूर्व संध्या पर वाराणसी के राजघाट स्थित रविदास मंदिर में संत शिरोमणि को अंगवस्त्र एवं पुष्प अर्पित किया गया और इनके वचनों को समाज के लिए प्रेरणा स्त्रोत बताया गया।
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राजघाट संत रविदास मंदिर
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
संत रविदास समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी वाणी में समता और समरसता झलकती है। यह उद्गार राजघाट यो गंगा तट पर स्थित बाबू जगजीवन राम द्वारा स्थापित गुरु रविदास मंदिर में आयोजित जन्मोत्सव समारोह के दूसरे दिन मंगलवार को लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार के सुपुत्र डॉक्टर अंशुल अभिजित ने व्यक्त किये।
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उन्होंने बताया कि संत रविदास की सोच बेगमपुरा जैसे आधुनिक भारत की थी जहां पर न कोई गम है और न ही कोई भेदभाव है। ऐसे शहर की कल्पना थी। नानू जगजीवन राम भी संत रविदास के विचारों का अनुसरण करते हुए इस मंदिर का निर्माण कराया, जहां सभी धर्मों के लोग संत शिरोमणि के दरबार में अपना शीश झुकाने आते हैं, उनकी कृपा और प्रेरणा लेकर सुखमय जीवन यापन करते हैं।
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डाक्टर अंशुल अविजित ने कहा कि भारत सार्थिक रूप से कितना भी संपन्न हो जाय लेकिन जब तक आधुनिकता के साथ-साथ समाज में समरसता नहीं आयेगी तब तक देश का सही मायने में विकास नहीं हो सकता।इस अवसर पर दी रविदास स्मारक सोसाइटी के महासचिव रतन लाल भगत ने कहा कि बाबू जी संत रविदास के अनन्य भक्त थे।
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यह मंदिर समतामूलक समाज की संकल्पना का प्रतीक है। मंदिर के शिखर पर बने चारों गुम्बद सर्व धर्म समभाव को दर्शाता है।