काशी में सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने मनाया आत्मज्ञान दिवस: बाबा दरबार में टेका मत्था, अनुयायियों से किया संवाद
आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव काशी में अपना आत्मज्ञान दिवस मनाया। काशी विश्वनाथ धाम में सत्संग में लोगों से नदियों के संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया।
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आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव ने आपने आत्मज्ञान दिवस पर शुक्रवार को काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर बाबा का दर्शन किया। स्वर्णमंडित गर्भगृह में पहली बार बाबा का दर्शन-पूजन कर रहे सदगुरुने इस दौरान धाम की शोभा भी निहारी। सदगुरु जग्गी वासुदेव जलमार्ग से काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। दरभंगा घाट स्थित बृजरमा पैलेस से वह नौका से ललिता घाट पहुंचे।
धाम पहुंचने पर अनुयायियों ने दोनों हाथ जोड़ कर उनका अभिवादन किया। विश्वनाथ धाम से लेकर मुख्य मंदिर परिसर तक अलग अलग जगहों पर उनके अनुयायियों का समूह मौजूद था। एनआरआई अनुयायी भी मुख्य परिसर में सदगुरु का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचे थे। बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन करने के बाद गर्भगृह से निकलने के बाद सदगुरु ने शिखर का दर्शन किया।
करीब आधा घंटा तक हजारों अनुयायियों के साथ विश्वनाथ मंदिर में रहने के बाद वह नदेसर स्थित होटल पहुंचे। 23 सितंबर को ही सदगुरु को मैसूर की पहाड़ी पर ध्यानावस्था में आत्मबोध हुआ था। तब से वह इस दिन को अपने आत्मज्ञान दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। वर्ष 2019 में पहली बार वह इस आध्यात्मिक उत्सव के लिए काशी आए थे। इसके बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे और वहां से काशी लौट आए।
वैदिक इतिहास के पन्ने पलटने से होगा ज्ञानवापी का समाधान
सदगुरु जग्गी वासुदेव ने नदेसर स्थित एक होटल में आत्मज्ञान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि आदियोगी शिव की नगरी काशी के कण कण में महादेव स्वयं विराजते हैं। वैदिक इतिहास शिव और शिवत्व की महिमा से भरे हुए हैं। ज्ञानवापी में मूल रूप से विराट शिव मंदिर ही विराजमान था। हमारे हजारों वर्ष पुरातन वैदिक इतिहास ज्ञानवापी के शिव मंदिर के अवर्णनीय वैभव से सज्जित है।