{"_id":"5dd304f08ebc3e54b639b3d2","slug":"sachchidanand-swami-varanasi-news-vns495118059","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वयं में मोक्ष का पर्याय है काशी : सच्चिदानंद स्वामी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वयं में मोक्ष का पर्याय है काशी : सच्चिदानंद स्वामी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। अवधूत दत्त पीठम् के पीठाधीश्वर गणपति सच्चिदानन्द स्वामी ने कहा कि काशी की महिमा अनंत है, प्रत्येक जीव राशि को यहां मोक्ष प्राप्त होता ही है। शिवाला स्थित चेतसिंह किले के मैदान में चल रहे अतिरूद्र महायज्ञ के पांचवें दिन काशी खण्ड पर अन्तिम प्रवचन देते हुए गणपति स्वामी ने कहा कि यह ऐसी भूमि है जहां मृत्यु के समय स्वयं भगवान विश्वेश्वर समस्त जीवों को राम नाम का कर्णमंत्र देते है। काशी स्वयं में मोक्ष का पर्याय है और सभी प्रकार के मंगल को प्रदान करने वाला है।
उन्होंने मणिकर्णिका तीर्थ के महात्म्य का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मणिकर्णिका तीर्थ का भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से आर्विभाव हुआ है। इसके अलावा एक अन्य कथा का वर्णन करते हुए बताया कि भगवती पार्वती के कर्ण के कुंडल की एक मणि यही गिरी थी, तब से इसे मणिकर्णिका के नाम से जाना जाता है। इस स्थान पर स्नान मात्र से मनुष्य सभी कामनाओं से अविमुक्त हो जाता है। इसलिए इसे अविमुक्त काशी भी बोलते है। उन्होंने कहा कि काशी का दूसरा नाम प्रकाश है जो मानव जाति से अज्ञान को दूर कर ज्ञानोदय कराता है। इस अवसर पर उन्होंने अपनी लिखी पुस्तक काशी खंड के तेलगू संस्करण का विमोचन भी किया।
भर्गा वेदिका में दी गयी पूर्णाहूति
अतिरूद्र महायज्ञ के पांचवें दिन गणपति सच्चिदानन्द स्वामी ने भर्गा वेदिका में पूर्णाहूति दी। यज्ञाचार्य बंशी कृष्ण घनपाठी एवं विशाल सलक्षण घनपाठी के आचार्यत्व में 121 भूदेवों ने श्रीकृष्ण यजुर्वेद के मंत्र से यज्ञ में आहुतियां दी। इससे पूर्व पीठाधीश्वर गणपति सच्चिदानन्द स्वामी ने श्रीदेवी चक्र पूजन किया। तत्पश्चात नर्वदेश्वर महादेव के शिवलिंग का विधिवत पूजन अर्चन किया गया। इस अवसर पर पीठ के उत्तराधिकारी श्रीदत्त विजयानन्द तीर्थ, एच.बी. प्रसाद, सुब्रमण्यम मणि आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने मणिकर्णिका तीर्थ के महात्म्य का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मणिकर्णिका तीर्थ का भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से आर्विभाव हुआ है। इसके अलावा एक अन्य कथा का वर्णन करते हुए बताया कि भगवती पार्वती के कर्ण के कुंडल की एक मणि यही गिरी थी, तब से इसे मणिकर्णिका के नाम से जाना जाता है। इस स्थान पर स्नान मात्र से मनुष्य सभी कामनाओं से अविमुक्त हो जाता है। इसलिए इसे अविमुक्त काशी भी बोलते है। उन्होंने कहा कि काशी का दूसरा नाम प्रकाश है जो मानव जाति से अज्ञान को दूर कर ज्ञानोदय कराता है। इस अवसर पर उन्होंने अपनी लिखी पुस्तक काशी खंड के तेलगू संस्करण का विमोचन भी किया।
विज्ञापन
भर्गा वेदिका में दी गयी पूर्णाहूति
अतिरूद्र महायज्ञ के पांचवें दिन गणपति सच्चिदानन्द स्वामी ने भर्गा वेदिका में पूर्णाहूति दी। यज्ञाचार्य बंशी कृष्ण घनपाठी एवं विशाल सलक्षण घनपाठी के आचार्यत्व में 121 भूदेवों ने श्रीकृष्ण यजुर्वेद के मंत्र से यज्ञ में आहुतियां दी। इससे पूर्व पीठाधीश्वर गणपति सच्चिदानन्द स्वामी ने श्रीदेवी चक्र पूजन किया। तत्पश्चात नर्वदेश्वर महादेव के शिवलिंग का विधिवत पूजन अर्चन किया गया। इस अवसर पर पीठ के उत्तराधिकारी श्रीदत्त विजयानन्द तीर्थ, एच.बी. प्रसाद, सुब्रमण्यम मणि आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन