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निकाय चुनावः मंत्री के लिए ताक पर रखे कानून-कायदे, नियमों के खिलाफ मतदाता सूची में जोड़ा नाम
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Mon, 27 Nov 2017 10:30 AM IST
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मतदान करने के बाद मंत्री नीलकंठ तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
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निकाय चुनाव में बनारस में प्रदेश सरकार के विधि एवं न्याय राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने मतदान किया इस बात को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है कि कुछ दिन पहले तक तो नीलकंठ तिवारी का नाम मतदाता सूची में नहीं था, तो मंत्री ने वोट कैसे किया।
करीब एक सप्ताह पहले मंत्री के मतदाता सूची नाम नहीं होने की जानकारी मिली थी तो आननफानन में बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सर्वे करने वाले पर्यवेक्षक और बीएलओ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। साथ ही, मंत्री का नाम छूटने के मामले की जांच शुरू कर दी गई थी।
अब सवाल है कि क्या नीलकंठ तिवारी के लिए नियमों का तोड़ा गया। जबकि बनारस में समीक्षा करने आए प्रदेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि अधिसूचना जारी होने के बाद किसी का नाम मतदाता सूची में नहीं जोड़ा जा सकता।
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लेकिन उनकी बात को दरकिनार करते हुए जिला प्रशासन ने नीलकंठ तिवारी का नाम मतदाता सूची में शामिल कर लिया। इसका खुलासा मतदान से एक दिन पहले हुआ। जब यह जानकारी सूचना विभाग के अधिकृत व्हाट्सएप ग्रुप पर दी गई।
इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम सूची जारी होती है। इसके बाद किसी का नाम नहीं जोड़ा जा सकता। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। मंत्री का नाम मतदान से ठीक एक दिन पहले सूची में शामिल करना संवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
जब इस मामले में मीडिया ने मंत्री नीलकंठ तिवारी से बात की तो वह अपने ही बयान ही फंसते नजर आए। उन्होंने कहा कि उनका नाम पुराने पते कि मतदाता सूची में था, जब उनसे पूछा गया दो जगह नाम था तो बोले ऐसा भी नहीं था।
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करीब एक सप्ताह पहले मंत्री के मतदाता सूची नाम नहीं होने की जानकारी मिली थी तो आननफानन में बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सर्वे करने वाले पर्यवेक्षक और बीएलओ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। साथ ही, मंत्री का नाम छूटने के मामले की जांच शुरू कर दी गई थी।
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अब सवाल है कि क्या नीलकंठ तिवारी के लिए नियमों का तोड़ा गया। जबकि बनारस में समीक्षा करने आए प्रदेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि अधिसूचना जारी होने के बाद किसी का नाम मतदाता सूची में नहीं जोड़ा जा सकता।
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लेकिन उनकी बात को दरकिनार करते हुए जिला प्रशासन ने नीलकंठ तिवारी का नाम मतदाता सूची में शामिल कर लिया। इसका खुलासा मतदान से एक दिन पहले हुआ। जब यह जानकारी सूचना विभाग के अधिकृत व्हाट्सएप ग्रुप पर दी गई।
इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम सूची जारी होती है। इसके बाद किसी का नाम नहीं जोड़ा जा सकता। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। मंत्री का नाम मतदान से ठीक एक दिन पहले सूची में शामिल करना संवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
जब इस मामले में मीडिया ने मंत्री नीलकंठ तिवारी से बात की तो वह अपने ही बयान ही फंसते नजर आए। उन्होंने कहा कि उनका नाम पुराने पते कि मतदाता सूची में था, जब उनसे पूछा गया दो जगह नाम था तो बोले ऐसा भी नहीं था।
भाजपा मेयर प्रत्याशी पार्टी का दुपट्टा पहन मतदान स्थल पहुंची
भाजपा मेयर प्रत्याशी मृदुला जयसवाल
- फोटो : file photo
यूपी नगर निकाय चुनाव के दूसरे चरण का मतदान हो रहा है है। दूसरे चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी वोट डाले जा रहे हैं। वाराणसी में अचार संहिता के उल्लंघन का मामला सामने आया है।
अग्रसेन महाजनी विद्यालय में मतदान करने पहुंची भाजपा मेयर प्रत्याशी मृदुला जयसवाल जब वोट देकर बूथ से बाहर निकल रहीं थी तब उन्होंने भाजपा का दुपट्टा ओढ़ रखा था।
जिस पर बूथ पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने इसे आजार संहिता का उलंघन बताते हुए दुपट्टा उतारने को कहा को मृदुला जयलवाल दुपट्टा उतार कर बूथ से बाहर चली गईं। विरोधियों द्वारा इस बात की शिकायत प्रशासन को दर्ज कराई तो मृदुला जयसवाल को जिला प्रशासन ने हिदायत दी।
अग्रसेन महाजनी विद्यालय में मतदान करने पहुंची भाजपा मेयर प्रत्याशी मृदुला जयसवाल जब वोट देकर बूथ से बाहर निकल रहीं थी तब उन्होंने भाजपा का दुपट्टा ओढ़ रखा था।
जिस पर बूथ पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने इसे आजार संहिता का उलंघन बताते हुए दुपट्टा उतारने को कहा को मृदुला जयलवाल दुपट्टा उतार कर बूथ से बाहर चली गईं। विरोधियों द्वारा इस बात की शिकायत प्रशासन को दर्ज कराई तो मृदुला जयसवाल को जिला प्रशासन ने हिदायत दी।
मंत्री नीलकंठ तिवारी के वोट को अवैध घोषित करने की मांग
मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी युवा कांग्रेस ने चुनाव आयोग से सूबे के मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी के मत को अवैध घोषित करने की मांग की है। प्रदेश प्रवक्ता अमित राय ने कहा कि जब चुनाव आयोग का यह स्पष्ट निर्देश है कि अधिसूचना जारी होने के बाद मतदाता सूची में किसी का भी नाम नहीं जोड़ा जा सकता। बावजूद इसके सत्ता के दबाव में मंत्री का नाम नियम विरुद्ध तरीके से जोड़ा गया।
भाजपा के मंत्री के लिए अलग से नियम क्यों? शहर में हजारों मतदाता वोटरलिस्ट में नाम न होने से अपने मताधिकार से वंचित हो गए। यदि मंत्री के लिए नियम था तो इनके लिए नियम क्यों नहीं था।
मंत्री का नाम नियम विरुद्ध तरीके से किन परिस्थितियों में जोड़ा गया, चुनाव आयोग इसकी जांच करे और मंत्री के मत को अवैध घोषित करे। या फिर जो भी मतदाता सूची में नाम न होने से मतदान से वंचित रह गए हैं, उनके नाम शामिल कराकर उन्हें दोबारा मतदान का मौका दिया जाए।
भाजपा के मंत्री के लिए अलग से नियम क्यों? शहर में हजारों मतदाता वोटरलिस्ट में नाम न होने से अपने मताधिकार से वंचित हो गए। यदि मंत्री के लिए नियम था तो इनके लिए नियम क्यों नहीं था।
मंत्री का नाम नियम विरुद्ध तरीके से किन परिस्थितियों में जोड़ा गया, चुनाव आयोग इसकी जांच करे और मंत्री के मत को अवैध घोषित करे। या फिर जो भी मतदाता सूची में नाम न होने से मतदान से वंचित रह गए हैं, उनके नाम शामिल कराकर उन्हें दोबारा मतदान का मौका दिया जाए।