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जिन पर हिफाजत का जिम्मा वही लूट रहे
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
Updated Thu, 29 Jan 2015 02:02 AM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित पूरा रेल महकमा सफाई और सुरक्षा के लिहाज से कैंट रेलवे स्टेशन को मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित करना चाहता है मगर बुधवार को यहां स्टेशन पर जो कुछ घटा उससे दोनों के प्रयासों को तगड़ा झटका लगा है।
आरपीएफ और जीआरपी के जवानों की मनमानी और वसूली की यह कोई पहली घटना नहीं और न ही रेल हादसे में जान जाने की पहली घटना है। जिन्हें रेल की संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा मिला है वही अमानत में खयानत कर रहे।
भोले-भाले यात्रियों को कभी टिकट चेकिंग तो कभी उनके लगेज की चेकिंग के नाम पर सुरक्षाकर्मी परेशान करते हैं। ट्रेनों और प्लेटफार्मों पर गंदगी फै लाने का आरोप लगाकर वसूली आम है। ये जवान बेटिकट यात्रियों और अवैध वेंडरों से भी जुर्माने की आड़ में वसूली करते हैं। जनरल बोगी में सीट दिलाकर और वाहनों की अवैध पार्किगिं कराकर भी वसूली का धंधा बदस्तूर चल रहा है।
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आरपीएफ और जीआरपी जवानों की इस कारगुजारी के जारी रहते कैंट स्टेशन को माडल स्टेशन का दर्जा दिलाना बड़ी चुनौती है। ऐसा नहीं कि आला अधिकारियों को इनकी कारगुजारियों की जानकारी नहीं मगर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई न होना सवाल खड़ा करता है। गौर करने वाली बात यह है कि आरपीएफ हो या जीआरपी इनके निशाने पर जनरल बोगी में सफर करने वाले यात्री ही होते हैं।
उसकी बड़ी वजह है। ज्यादातर यात्री कम पढ़े लिखे और ग्रामीण परिवेश से आते हैं। इन्हें रेलवे के कायदे कानूनों की समझ कम होती है। वर्दी की धौंस में आसानी से आ जाते हैं और अपने साथ हुई बदसलूकी की आगे शिकायत भी नहीं करते।
आखिर दूसरी टीम का क्या?
वाराणसी। कैंट स्टेशन पर बुधवार को हुई घटना में आरपीएफ की ‘दूसरी टीम’ का भी जिक्र आया है। आखिर ये दूसरी टीम क्या है इसका जवाब किसी के पास नहीं। बुधवार की सुबह आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त ने सिपाहियों की शिनाख्त परेड कराई। इसमें एक जवान की संलिप्तता सामने आई है। उधर, जीआरपी की ओर से शिनाख्त सरीखी कोई पहल नहीं की गई है।
मामा की गोद में ढूढ़ती रही मां का आंचल
आरपीएएफ जवानों की वसूली से बचने के लिए दुर्गियाना एक्सप्रेस ट्रेन से गिरकर जान गंवाने वाली महिला की डेढ़ साल की मासूम बेटी मामा की गोद में मां का आंचल ढूंढ़ती रही। परिवार के लोग बिलखती बच्ची को शांत कराने की कोशिश में लगे रहे मगर बच्ची आंसू थमे ही नहीं। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में एक तरफ नौनिहाल का रोना व दूसरी तरफ कफन में लिपटी मां की लाश देखकर लोगों के आंसू छलक पड़े।
क्यों नहीं पड़ी अधिकारियों की नजर
कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर पांच पर दुर्गियाना एक्सप्रेस ट्रेन में हुई घटना से रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी अनजान कैसे रहे, उन तक घटना की जानकारी कैसे नहीं पहुंची, यह सब सवाल सुरक्षा में बड़ी चूक की ओर इशारा कर रहा है। यह घटना तब हुई जब इसी समय प्लेटफार्म नंबर चार पर खड़ी राजधानी एक्सप्रेस में मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति के हंगामे के चलते रेल प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े कई अधिकारी मौजूद थे मगर किसी को भी साथ लगे प्लेटफार्म पर हुई घटना की भनक न लगना भी चर्चा का विषय रहा।
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आरपीएफ और जीआरपी के जवानों की मनमानी और वसूली की यह कोई पहली घटना नहीं और न ही रेल हादसे में जान जाने की पहली घटना है। जिन्हें रेल की संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा मिला है वही अमानत में खयानत कर रहे।
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भोले-भाले यात्रियों को कभी टिकट चेकिंग तो कभी उनके लगेज की चेकिंग के नाम पर सुरक्षाकर्मी परेशान करते हैं। ट्रेनों और प्लेटफार्मों पर गंदगी फै लाने का आरोप लगाकर वसूली आम है। ये जवान बेटिकट यात्रियों और अवैध वेंडरों से भी जुर्माने की आड़ में वसूली करते हैं। जनरल बोगी में सीट दिलाकर और वाहनों की अवैध पार्किगिं कराकर भी वसूली का धंधा बदस्तूर चल रहा है।
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आरपीएफ और जीआरपी जवानों की इस कारगुजारी के जारी रहते कैंट स्टेशन को माडल स्टेशन का दर्जा दिलाना बड़ी चुनौती है। ऐसा नहीं कि आला अधिकारियों को इनकी कारगुजारियों की जानकारी नहीं मगर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई न होना सवाल खड़ा करता है। गौर करने वाली बात यह है कि आरपीएफ हो या जीआरपी इनके निशाने पर जनरल बोगी में सफर करने वाले यात्री ही होते हैं।
उसकी बड़ी वजह है। ज्यादातर यात्री कम पढ़े लिखे और ग्रामीण परिवेश से आते हैं। इन्हें रेलवे के कायदे कानूनों की समझ कम होती है। वर्दी की धौंस में आसानी से आ जाते हैं और अपने साथ हुई बदसलूकी की आगे शिकायत भी नहीं करते।
आखिर दूसरी टीम का क्या?
वाराणसी। कैंट स्टेशन पर बुधवार को हुई घटना में आरपीएफ की ‘दूसरी टीम’ का भी जिक्र आया है। आखिर ये दूसरी टीम क्या है इसका जवाब किसी के पास नहीं। बुधवार की सुबह आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त ने सिपाहियों की शिनाख्त परेड कराई। इसमें एक जवान की संलिप्तता सामने आई है। उधर, जीआरपी की ओर से शिनाख्त सरीखी कोई पहल नहीं की गई है।
मामा की गोद में ढूढ़ती रही मां का आंचल
आरपीएएफ जवानों की वसूली से बचने के लिए दुर्गियाना एक्सप्रेस ट्रेन से गिरकर जान गंवाने वाली महिला की डेढ़ साल की मासूम बेटी मामा की गोद में मां का आंचल ढूंढ़ती रही। परिवार के लोग बिलखती बच्ची को शांत कराने की कोशिश में लगे रहे मगर बच्ची आंसू थमे ही नहीं। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में एक तरफ नौनिहाल का रोना व दूसरी तरफ कफन में लिपटी मां की लाश देखकर लोगों के आंसू छलक पड़े।
क्यों नहीं पड़ी अधिकारियों की नजर
कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर पांच पर दुर्गियाना एक्सप्रेस ट्रेन में हुई घटना से रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी अनजान कैसे रहे, उन तक घटना की जानकारी कैसे नहीं पहुंची, यह सब सवाल सुरक्षा में बड़ी चूक की ओर इशारा कर रहा है। यह घटना तब हुई जब इसी समय प्लेटफार्म नंबर चार पर खड़ी राजधानी एक्सप्रेस में मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति के हंगामे के चलते रेल प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े कई अधिकारी मौजूद थे मगर किसी को भी साथ लगे प्लेटफार्म पर हुई घटना की भनक न लगना भी चर्चा का विषय रहा।