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रोजा जकात से कट गया, रोजी-रोटी पर छाए संकट के बादल

Mon, 17 May 2021 01:13 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 17 May 2021 01:13 AM IST
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Rosa was cut off from zakat, the cloud of crisis dominated the livelihood
रोजा जकात से कट गया, रोजी-रोटी पर छाए संकट के बादल
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रोजा तो जकात से कट गया, लेकिन अब आगे घर-गृहस्थी की गाड़ी कैसे चलेगी। यह चिंता अब बुनकरों को सताने लगी है। तानाबाना से काशी का नाम दुनिया भर में पहुंचाने वाले बुनकरों की हालत कोरोना संक्रमण ने खराब कर रखी है।
बनारस के ही सवा लाख बुनकरों के परिवार की बात करें तो कुल मिलाकर बनारसी साड़ी उद्योग में मेहनत करने वाले आश्रित बुनकरों और उनके परिवार की संख्या छह लाख से ऊपर है। पिछले कोरोना काल में परिवार का पेट पालने के लिए पावरलूम तक बेचने पड़े थे। दूसरी लहर ने छोटे बुनकरों की कमर तोड़कर रख दी है। बुनकर नेता इदरीस अंसारी ने बताया कि रमजान में बुनकरों के जीवन के पटरी की गाड़ी किसी तरह खींच गई, लेकिन अब आगे कैसे चलेगा यह चिंता सभी को सताने लगी है।
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पीलीकोठी निवासी अहान अहमन ने पांच पावरलूम का कारखाना लगाया था। लॉकडाउन के बाद इसमें से दो पिछले साल बेचने पड़े थे। दूसरी लहर ने तो हालत और ज्यादा खराब कर रखी है। मदनपुरा के नईम और नसीम अली के पावरलूम तो बंद ही चल रहे हैं। बुनकर कालोनी के फहीम ने बताया कि रोजे के दौरान तो बहुत से बुनकरों को जकात के जरिए काफी मदद मिली। ऐसी मंदी की हालत में बुनकरों के सामने फांकाकशी की नौबत आ सकती है। यह महज बानगी भर है काशी के बुनकरों के दर्द की।
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ठप पड़ा हुआ है बनारसी वस्त्र उद्योग
बनारसी वस्त्र उद्योग पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। पिछले साल से ही महामारी की मार झेल रहा बुनकरों का तबके की कमर टूट चुकी है। पिछले साल ही घर का खर्च चलाने में सारी जमा पूंजी टूट गई। न नए आर्डर हैं व न कारोबार दोबारा शुरू होने की उम्मीद। गद्दीदारों ने भी बुनकरों की मदद से अपने हाथ खींच लिए थे।
नहीं मिल रहे हैं बाहर से आर्डर
पार्षद हाजी ओकास अंसारी ने बताया कि कोरोना के कारण बाहर से आने वाले आर्डर नहीं मिल रहे हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, सूरत और बांग्लादेश से भी आर्डर नहीं आ रहे हैं। आर्डर नहीं आने के कारण गृहस्था व गद्दीदारों की पेमेंट फंसी हुई है। इसके कारण ना तो छोटे बुनकरों को आर्डर मिल रहे हैं और ना ही पुराना पेमेंट।
नहीं मिली कोई मदद
क्षेत्रीय पार्षद हाजी ओकास अंसारी ने बताया कि बनारस का बुनकर सालाना करोड़ों रुपये का व्यापार करके देता है। साड़ी का कारोबार सालाना पांच अरब रुपये से भी ज्यादा का है और उसका राजस्व सरकार को भी मिलता है। कई बार बुनकरों की सूची बनाकर संबंधित अधिकारियों को दी, लेकिन कोई मदद नहीं मिली है।
50 साल पीछे हो गए बुनकर
बुनकर रमजान ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते बनारस साड़ी उद्योग और बुनकर 50 साल पीछे हो गए हैं। बनारस में बिनकारी का काम खत्म हो गया है। सरकार जिस तरह से किसानों की मदद कर रही है उसी तरह बुनकरों की भी मदद करनी चाहिए।
साड़ी कारोबार के पटरी पर लौटने की उम्मीद कम
सरैया के बुनकर अकील अहमद ने बताया कि कोरोना संक्रमण के पहले उनका बुनकारी का काम ठीक था, लेकिन कच्चे माल के नाम पर साड़ी बनाने का मटेरियल ताना-बाना ही नहीं मिल रहा है। साड़ी कारोबार पूरी तरह से बेपटरी हो चुका है।
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29 हजार रेहड़ी, पटरी दुकानदारों को मिलेगा 1000 रुपये गुजारा भत्ता व राशन
वाराणसी। फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले 29 हजार दुकानदारों को 1000 प्रतिमाह भत्ता और तीन महीने का राशन दिया जाएगा। इसके लिए शासन से गाइडलाइन का इंतजार किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने रेहड़ी, फुटकर और पटरी दुकानदारों को गुजारा भता देने को कहा है। बाजार बंद होने से फुटकर दुकानदार, रेहड़ी और पटरी वाले बेरोजगार हो गए। कोरोना कर्फ्यू में इनको आर्थिक दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए सरकार ने इन्हें भत्ते दिए जाने का अहम फैसला लिया है।
डूडा की परियोजना अधिकारी डॉ. जया सिंह ने बताया कि गुजारा भत्ता और राशन देने की सूचना मिली है। लेकिन अभी तक कोई गाइडलाइन नहीं आई है। गाइडलाइन आने के बाद ही इनके लिए व्यवस्था कराई जाएगी। पिछले दिनों सड़क पर व्यापार करने वालों का सर्वे कराया गया था। उस दौरान 29 हजार वेंडर्स चिन्हित किए गए थे। इन सभी के मोबाइल नंबर और बैंक खाते आपस में लिंक किए गए हैं। फेरी पटरी ठेला व्यवसाय समिति से जुड़े जगदीश ने कहा कि 1000 रुपये गुजारा भत्ता मिलने से पटरी दुकानदारों को काफी राहत होगी।
कोरोना कर्फ्यू में दुकान खोलने पर पाबंदी लगाई गई है। मुसीबतों के लिए बचत किया गया पैसा भी खर्च हो गया है। ऐसे में परिवार का पेट पालने में काफी दिक्कत हो रही है। नई योजना के बारे में अभी नहीं पता है। -मुन्नी देवी, कॉस्मेटिक्स विक्रेता दशाश्वमेध
पिछली बार के लॉकडाउन में स्वनिधि योजना ने सहारा दिया था। इस बार खुद का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं तो सरकार के पैसे समय पर कैसे लौटा पाएंगे। अन्य लोगों की तरह दुकान खोलने की अनुमति दी जाए। -गीता देवी, रेडीमेड कपड़ा विक्रेता इंग्लिशिया लाइन
किसी तरह से परिवार का खर्च उठा पा रहे हैं। घर मे अनाज भी खत्म होने को है। रोजाना आमदनी से जो भी बचत करते थे। वो भी खत्म होने की कगार पर है। सरकार द्वारा राहत दी जाएगी ऐसा सुना है। - विकास यादव, चाय विक्रेता कबीरचौरा

सभी पथ विक्रेताओं को कोरोना कर्फ्यू से ऋण की किस्तों को हर माह भरने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। संपूर्ण किस्तों की समय सीमा छह माह आगे बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। - अभिषेक निगम, सचिव फेरी पटरी ठेला व्यवसायी समिति
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