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Varanasi News : केवल गिरजाघर तक ही बन सकता है रोपवे, 10 दिन बाद होने वाले प्रजेंटेशन में तय होगी रूपरेखा

Thu, 31 Oct 2024 09:54 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 31 Oct 2024 09:54 AM IST
सार

Varanasi News : वाराणसी में रोपवे का काम तेजी से चल रहा है। आखिरी स्टेशन के लिए सर्वे शुरु हो गया है। तीन स्थानों में एक को फाइनल करने के लिए अधिकारी विमर्श कर रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि रोपवे का डिजाइन बदल सकता है।

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Ropeway built only till church in varanasi outline decided presentation held after 10 days
वाराणसी में एक स्थान पर रखा गंडोला। - फोटो : संवाद

विस्तार

रोपवे की डिजाइन बदल सकती है। कैंट से गोदौलिया तक जाने वाले रोपवे को गिरजाघर तक ही बनाने पर विचार चल रहा है। रोपवे का आखिरी स्टेशन कहां हो, इसके लिए सर्वे शुरू हो गया है। गिरजाघर, गोदौलिया और दशाश्वमेध प्लाजा में से किसी एक जगह पर अंतिम स्टेशन बनाया जाएगा। 

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एनएचएलएमएल की टेक्निकल टीम जीपीआर तकनीक से सर्वे करने में जुटी है। जल्द ही वह अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपेगी। इसके बाद प्रजेंटेशन में जनप्रतिनिधि और अधिकारियों की मौजूदगी में रूपरेखा तय होगी। रोप-वे की कुल दूरी 3.85 किलोमीटर है। इस योजना की लागत 807 करोड़ रुपये है। 
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कैंट से गोदौलिया चौराहे तक कुल पांच स्टेशन होंगे। इसमें कैंट रेलवे स्टेशन, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया चौराहे पर स्टेशन बनेंगे। कैंट, काशी विद्यापीठ और रथयात्रा पर स्टेशन का निर्माण काम अंतिम दौर में है। गिरजाघर पर काम शुरू हुआ है। गोदौलिया पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है। 

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तेजी से चल रहा है काम
वीडीए सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा के अनुसार अब तक की जानकारी के अनुसार कैंट से गोदौलिया तक रोपवे का निर्माण होना है। इसकी डिजाइन में परिवर्तन की कोई सूचना नहीं है। नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) की अधिकारी के अनुसार गिरजाघर पर काम चल रहा है। आगे के काम की जानकारी नहीं है। 

उधर, दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि गिरजाघर का पिछले दिनों निरीक्षण करने गया था। उस दौरान जनता की समस्याओं को ध्यान में रखकर रोपवे के अधिकारियों से आग्रह किया था इसे गिरजाघर तक की बनाएं। अभी तक मेरे आग्रह के बारे में कोई सूचना नहीं दी है।

जीपीआर तकनीक से सर्वे के फायदे
जीपीआर तकनीक से सर्वे करने के कई फायदे हैं। इससे जमीन के नीचे की सभी सीवर, बिजली, पानी की लाइनों का पता चल सकेगा। इससे रोपवे के पिलर के लिए बेस बनाने में आसानी होगी। जहां पर संभव नहीं होगा, वहां पिलर के लिए खोदाई नहीं की जाएगी। नीचे सीवर की बड़ी लाइन है। इसे छेड़ने से शहर की सीवर व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसे देखते हुए जीपीआर सर्वे कराया जा रहा है। 

एनएचएलएमएल के अनुसार पहले चरण का काम मार्च 2025 तक पूरा किया जाना है। सभी रोप-वे स्टेशन पर वाराणसी के प्रतीक को दिखाने का प्रयास है। रोप-वे में डमरू-त्रिशूल-शंख-नदी और घाट, काशी की थीम दिख रही है। देश की धार्मिक राजधानी काशी में नए भवनों को धार्मिक स्वरूप दिया जा रहा है। दुनिया का तीसरे और देश के पहले अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए रोप-वे निर्माणाधीन है।

बोले अधिकारी
रोपवे को लेकर कार्यदायी एजेंसी की टेक्निकल टीम सर्वे कर रही है। 10 दिन बाद वे रिपोर्ट देगी। इसके बाद जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। इसमें कार्यदायी एजेंसी प्रजेंटेशन देगी। इसमें तय होगा कि रोपवे का आखिरी स्टेशन कहां हो। गिरिजाघर पर स्टेशन होगा तो यहां डिजाइन बदल जाएगी। - कौशलराज शर्मा, मंडलायुक्त

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