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भक्ति भाव: रोहिणी नक्षत्र और धृति योग में सुहागिनों ने रखा वट सावित्री व्रत, सत्यवान और यमराज की हुई पूजा

Thu, 06 Jun 2024 04:29 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 06 Jun 2024 04:29 PM IST
सार

Varanasi News: भगवान बुद्ध को बरगद वृक्ष के नीचे ही ज्ञान प्राप्त हुआ था। वट वृक्ष को पर्यावरण का संरक्षक भी माना जाता है। ये पेड़ सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों में से एक है। धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टिकोण से जीवन के लिए महत्वपूर्ण है।

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Rohini Nakshatra and Dhriti Yoga today married women kept Vat Savitri fast worship Satyavan and Yamraj
वटवृक्ष की पूजा करतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्येष्ठ मास कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि में गुरुवार को रोहिणी नक्षत्र और धृति योग में वट सावित्री पर्व मनाया जाएगा। सुहागिनें वट सावित्री व्रत रखकर बरगद के वृक्ष और सावित्री, सत्यवान व यमराज की पूजा करेंगी। कथा का श्रवण करेंगी। हालांकि, इस मास की त्रयोदशी से अमावस्या तिथि तक वट सावित्री व्रत रखने का विधान है।

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सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और मनोरथ की पूर्ति के लिए वट सावित्री व्रत रखती हैं। कुछ महिलाएं व्रत तीन दिनों तक रखती हैं। ज्यादातर महिलाएं अमावस्या को यह व्रत रखती हैं। देवी सावित्री के सम्मान में महिलाएं सोलह शृंगार कर बरगद की पूजा करने तक निर्जला व्रत रखती हैं। वट, सावित्री-सत्यवान और यमराज की पूजा करने के बाद बरगद के पेड़ की कोंपल खाकर अपना व्रत को खोलती हैं।
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आचार्य शुभम मिश्रा व आचार्य अमित मिश्रा ने बताया कि पुराणों में वट में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास बताया गया है। इसके नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा आदि सुनने से मनोकामना पूरी होती है। वट वृक्ष अपनी विशालता के लिए भी प्रसिद्ध है। दार्शनिक दृष्टि से वट वृक्ष दीर्घायु, अमरत्व बोध और ज्ञान का प्रतीक है। 
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ऐसे करें पूजा
पूजा स्थल पर रंगोली बनाएं। पूजा की सामग्री रखें। पूजा स्थल पर एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर लक्ष्मी नारायण और शिव-पार्वती की मूर्ति रखें। पहले गणेश जी और माता गौरी की पूजा करें। फिर बरगद के वृक्ष की पूजा करें। पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भिगोया हुआ चना, फूल और धूप का उपयोग करें। 


बरगद की परिक्रमा कर धागे से लपेटें। चना, वस्त्र और कुछ धन अपनी सास को देकर आशीर्वाद प्राप्त करें। सावित्री-सत्यवान की कथा का पाठ और श्रवण करें। गरीब सुहागिनों को पूजन सामग्री दान दें।

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