सर्व विद्या की राजधानी में शिक्षा और शोध का, विद्या और बोध का इतना बड़ा मंथन होगा तो उससे निकलने वाला अमृत देश को नई दिशा देगा। अखिल भारतीय शिक्षा समागम का आयोजन उस पवित्र धरती पर हो रहा है, जहां आजादी से देश पहले देश की इतनी महत्वपूर्ण यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई थी। बृहस्पतिवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष क न्वेंशन सेंटरमें शिक्षा मंत्रालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और बीएचयू के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये बातें कहीं।
समागम का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को उनकी जिम्मेदारी का भी अहसास कराया। लैब टू लैंड का रोड मैप होना चाहिए। कृषि विश्वविद्यालयों के लैब में होने वाले रिसर्च का लाभ किसानों को भी मिलना चाहिए। और किसानों के अनुभव को लैब में भी इस्तेमाल करना चाहिए। आज दुनिया के कई देश जड़ी बूटियों से पारंपरिक इलाज में हमसे आगे हैं। हमारे पास भी यह पारंपरिक इलाज हैं और इसका परिणाम दुनिया ने देखा है। हमारे पास परिणाम के साथ प्रमाण भी होने चाहिए। डेटा बेस होना चाहिए। दुनिया के समृद्ध देश परेशान हैं कि वहां बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही, युवा पीढ़ी कम हो रही है। हमारे यहां भी जल्द ऐसा समय आने वाला है। इसका समाधान खोजना होगा।