जल्द साकार होगा बनारस में रोपवे का सपना, ऑस्ट्रियन कंपनी करेगी भारत का सहयोग
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काशीवासियों का रोपवे चलने का सपना जल्द ही साकार होने वाला है। राइट्स संस्था, वाराणसी में इस पर रिपोर्ट तैयार कर रही है। इसके बाद भारतीय कंपनी और ऑस्ट्रियन कंपनी मिलकर एक साथ काम करेगी।
सुगम यातायात के लिए तैयार होने वाला 10 सीटर रोपवे 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगा। रोपवे को वरुणा और गंगा के जल परिवहन से जोड़ने की भी योजना है। कार्यदायी संस्था रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विसेज (राइट्स) की रिपोर्ट के बाद दुनिया भर में 15 हजार से अधिक रोपवे बना चुकी ऑस्ट्रियन कंपनी डॉपेलमेर, भारतीय कंपनी वैपकास का सहयोग करेगी।
तीन रूटों पर प्रस्तावित रोपवे और जल परिवहन का तीनों कंपनियों के प्रतिनिधि 20 जून से अध्ययन शुरू कर सकते हैं। रोपवे के लिए शासन की सहमति मिलने के बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्लेटफार्म तैयार किया जा रहा है।
इसमें वरुणा के दोनों रिवर फ्रंट पर रोपवे और शहर के पुराने और नए हिस्से को जोड़ने वाले बाबतपुर एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन तक केबल कार के संचालन की रूपरेखा बनाई जा रही है। रोपवे और जल परिवहन से ही फीडर बस सेवा जोड़ी जाएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, रोपवे का पहला रूट शिवपुर से कचहरी, सिगरा, रथयात्रा होते हुए लंका, दूसरा कचहरी से लहुराबीर, मैदागिन, गोदौलिया होते हुए लंका और तीसरा रूट लहरतारा से नरिया होते हुए बीएचयू तक है। वरुणा और गंगा में जल परिवहन विकसित करने और उसे रोपवे से जोड़ने की जिम्मेदारी भी कार्यदायी संस्था को सौंपी जाएगी।
वरुणा बनेगी पर्यटन का प्रमुख केंद्र
यातायात प्रबंधन की नई योजना में वरुणा के डीएम बंगला और सरायमोहना हिस्सों को रोपवे से जोड़ा जाएगा। वरुणा में अत्याधुनिक नावों से जल परिवहन होगा। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नदी के दोनों तटों को विकसित किया जाएगा। लाइट और फब्बारे भी होंगे, ताकि रोपवे से नीचे का नजारा खूबसूरत दिखे।
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि यातायात प्रबंधन के लिए मजबूत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। पूरी योजना के साथ काम शुरू कराया जाएगा, ताकि शहर की समस्या को दूर किया जा सके। इसके लिए हर पहलू का अध्ययन किया जा रहा है।