{"_id":"6633dc178a19823ad5050145","slug":"rishi-varun-performed-at-sankatmochan-sangeet-samaroh-in-varanasi-2024-05-03","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"संकटमोचन संगीत समारोह: जननी मैं न जीयूं बिन राम... से ऋषि-वरुण ने की विहान की अगवानी, मंत्रमुग्ध हुए दर्शक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संकटमोचन संगीत समारोह: जननी मैं न जीयूं बिन राम... से ऋषि-वरुण ने की विहान की अगवानी, मंत्रमुग्ध हुए दर्शक
Fri, 03 May 2024 12:02 AM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Fri, 03 May 2024 12:02 AM IST
सार
संकटमोचन संगीत समारोह में ऋषि-वरुण ने स्वरों से हनुमत प्रभु के पांव पखारे। समारोह के पांचवीं निशा के अंतिम प्रहर में पिता-पुत्र की जोड़ी ने सितार-तबले से प्रभु को रिझाया।
विज्ञापन
ऋषि-वरुण ने स्वरों से हनुमत प्रभु के पखारे पांव
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
संकटमोचन संगीत समारोह की पांचवीं निशा के अंतिम प्रहर में युवा कलाकार ऋषि-वरुण मिश्रा के स्वरों से विहान हुआ। उन्होंने जननी जननी मैं न जीयूं बिन राम... से विहान की अगवानी की। वहीं, शयन के बाद उठे हनुमत प्रभु के दर्शन को कतार लगी थी। जय श्रीराम, जय हनुमान और हर हर महादेव... के जयघोष हो रहे थे।
विज्ञापन
छठवीं प्रस्तुति लेकर रात करीब 1:30 बजे हैदराबाद के वरिष्ठ कलाकार डॉ. येल्ला वेंकटेश्वर राव मृदंगम के साथ मंचासीन हुए। उन्होंने सात मात्रा के मिश्र चापू ताल में टुकड़ा और तिहाई की प्रस्तुति दी। अद्धा और तिहाइयों का भी प्रयोग प्रशंसनीय रहा। डॉ. येल्ला ने मृदंगम पर ऐसा जादू चलाया कि श्रोता चकित हो गए। वायलिन पर श्रीधर ने संगत की। सातवीं प्रस्तुति भी खास रही।
विज्ञापन
पिता-पुत्र की जोड़ी ने सितार और तबले की प्रस्तुति बेजोड़ रही। कोलकाता के प्रख्यात कलाकार पं. नयन घोष अपने पुत्र ईशान घोष के साथ यादगार प्रस्तुति दी। उन्होंने सितार पर लुप्त हो रहे राग भटियार और राग रामकली को साधकर श्रोताओं को परिचित कराया। श्रोताओं के अनुरोध पर उन्होंने राग ब्रह्म ललित में निबद्ध ठुमरी ‘आई सावन की बहार’ का गायन करते हुए वादन किया।
विज्ञापन
पांचवीं निशा की अंतिम प्रस्तुति बनारस घराने के मिश्र बंधुओं की रही। प्रयागराज के युवा कलाकार ऋषि-वरुण मिश्र ने जब मंच संभाला तो निशा अंतिम प्रहर में थी। राग वसंत मुखारी में अति विलंबित एक ताल की बंदिश सुनाई। बोल थे- तू ही करतार जग के पालनहार...।
इसके बाद तीन ताल में रे मनवा बांवरे... में बांवरे शब्द को अलग-अलग भावों के साथ उपस्थित किया। इत उत तू काहे ढूंढे फिरे... को राग के अनुसार सुरों से सजाया। भैरवी में टप्पा सुनाया। इनके साथ तबला पर प्रशांत मिश्र, संवादिनी पर अनुराग मिश्र ओर सारंगी पर विनायक सहाय ने संगत की। वहीं, पांचवी निशा में हनुमत प्रभु की शयन आरती रात में करीब एक बजे और करीब 4:45 बजे हुई।
डॉ. येल्ला 25 वर्षों से लगा रहे हैं हाजिरी
संकटमोचन संगीत समारोह में 25 सालों से प्रभु को प्रिय वाद्ययंत्र मृदंगम से हाजिरी लगा रहे डॉ. येल्ला वेंकटेश्वर राव दक्षिण भारत के इकलौते ऐसे कलाकार हैं। तंजौर घराने (तमिलनाडु) के डॉ. येल्ला ने कहा कि दुनिया में ऐसा समारोह कहीं नहीं होता है। देश के हर कलाकार को यहां प्रस्तुति देने की इच्छा होती है। विश्व में भारतीय संगीत की काफी इज्जत है।
इसके बाद तीन ताल में रे मनवा बांवरे... में बांवरे शब्द को अलग-अलग भावों के साथ उपस्थित किया। इत उत तू काहे ढूंढे फिरे... को राग के अनुसार सुरों से सजाया। भैरवी में टप्पा सुनाया। इनके साथ तबला पर प्रशांत मिश्र, संवादिनी पर अनुराग मिश्र ओर सारंगी पर विनायक सहाय ने संगत की। वहीं, पांचवी निशा में हनुमत प्रभु की शयन आरती रात में करीब एक बजे और करीब 4:45 बजे हुई।
डॉ. येल्ला 25 वर्षों से लगा रहे हैं हाजिरी
संकटमोचन संगीत समारोह में 25 सालों से प्रभु को प्रिय वाद्ययंत्र मृदंगम से हाजिरी लगा रहे डॉ. येल्ला वेंकटेश्वर राव दक्षिण भारत के इकलौते ऐसे कलाकार हैं। तंजौर घराने (तमिलनाडु) के डॉ. येल्ला ने कहा कि दुनिया में ऐसा समारोह कहीं नहीं होता है। देश के हर कलाकार को यहां प्रस्तुति देने की इच्छा होती है। विश्व में भारतीय संगीत की काफी इज्जत है।