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आजमगढ़ में इंटरनेट सेवा पर रोक का आदेश और दो दिनों के लिए प्रभावी
Fri, 20 Dec 2019 02:14 PM IST
स्वाधीन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: स्वाधीन तिवारी
Updated Fri, 20 Dec 2019 02:14 PM IST
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- फोटो : amar ujala
पहले तो लापरवाही के चलते जिले में नागरिकता संशोधन कानून की आग गरम होने दी गई, जब हालात बिगड़ने लगे तो डीजीपी के निर्देश पर डीएम ने बुधवार से दो दिनों के लिए जिले में इंटरनेट सेवा बंद करवा दी थी। इसी आदेश को और अधिक बढ़ाते हुए शुक्रवार से और दो दिनों तक इंटरनेट सेवा पर रोक को बढ़ा दिया गया।
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प्रशासन का मानना है कि विभिन्न सोशल साइटों के जरिए ही लोगों को भड़काया जा रहा है और ऐसे भ्रामक संदेश देने वाले कई लोगों की पहचान हो चुकी है। उनकी तलाश की जा रही है। बीते दो दिनों से ठप इंटरनेट के शुक्रवार को खुलने की आस लगाए लोगों को मायूसी ही मिली और जिले में इंटरनेट सेवा ठप हो जाने से तमाम व्यवस्थाएं बेपटरी हो गई हैं। एसपी त्रिवेणी सिंह ने बताया कि सोशल साइटों के जरिए भडक़ाने वाले कई ग्रुपों के लोगों की पहचान हुई है, उनकी तलाश के लिए टीमें लगाई गई हैं।
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बताते चलें कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध 14 दिसंबर को सबसे पहले शिब्ली कॉलेज परिसर में शुरू हुआ। इसी दिन आक्रोशित लोगों ने 16 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी। बावजूद इसके प्रशासन ढील देता रहा। खुफिया विभाग के लोग भी इनके मंसूबों को नहीं भांप पाए।
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आलम यह रहा कि सोमवार को विरोध के दौरान प्रदर्शनकारी उग्र रहे। फिर भी प्रशासन ने सतर्कता नहीं बरती। लापरवाही का परिणाम रहा कि दूसरे दिन मंगलवार को मुबारकपुर कस्बे में हंगाता खड़ा हो गया। हालांकि प्रशासन ने इस पर काबू पा लिया। प्रशासन की जांच के दौरान मिले इनपुट के मुताबिक सोशल साइटों के जरिए कुछ विशेष लोग मैसेज भेजकर भड़का रहे हैं।
डीएम एनपी सिंह ने बताया कि उपद्रवी तत्वों की ओर से साम्प्रदायिक तनाव फैलाने के उद्देश्य से छात्रों को उकसाया जा रहा था। सोशल मीडिया, वाट्सएप, फेसबुक, ईमेल आदि का प्रयोग किया जा रहा था। धारा 144 लागू होने के बाद भी लेख, चित्र और वीडियो के माध्यम से अफवाह फैलाई जा रही थी। इनकी पहचान कर गिरफ्तारी के लिए जहां कई टीमें लगाई गई हैं।