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काशी में फिर से गूंजा, आजाद हैं आजाद रहेंगे
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पं. दीनदयाल हस्तकला संकुल का सभागार आजादी के रंगों से एकाकार हुआ। मंच से जब चंद्रशेखर आजाद की आवाज में आजाद हैं, आजाद रहेंगे... का संवाद गूंजा तो पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। तीन दिवसीय पुतुल महोत्सव के अंतिम दिन संकुल सभागार में आजादी के विविध रंग और भी चटख होकर निखर उठे।
संगीत नाटक अकादमी के तत्वावधान में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आयोजित पुतुल महोत्सव के अंतिम दिन की पहली प्रस्तुति सूत्रधार अकादमी लखनऊ की प्रस्तुति आजाद रही। मिलन यादव के निर्देशन में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के जीवन और स्वाधीनता संग्राम का जीवंत मंचन हुआ। दूसरी प्रस्तुति बनारस के क्रिएटिव पपेट थिएटर की प्रस्तुति मोहन से महात्मा रही। इसमें बालक मोहन दास करमचंद के महात्मा बनने की कथा का भावपूर्ण मंच हुआ। पुतुल उत्सव की अंतिम प्रस्तुति में प्रकृति की महिमा में प्रकृति की महत्ता और मानव जीवन के लिए साफ सुथरे पर्यावरण की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। बनारस के अभिनव समिति प्रस्तुति का निर्देशन राजेंद्र श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान मुख्य अतिथि जीआई विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. रजनीकांत, राजेश कुमार गौतम, जयंत चौधरी, उमा नांदुरी आदि मौजूद रहे।
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संगीत नाटक अकादमी के तत्वावधान में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आयोजित पुतुल महोत्सव के अंतिम दिन की पहली प्रस्तुति सूत्रधार अकादमी लखनऊ की प्रस्तुति आजाद रही। मिलन यादव के निर्देशन में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के जीवन और स्वाधीनता संग्राम का जीवंत मंचन हुआ। दूसरी प्रस्तुति बनारस के क्रिएटिव पपेट थिएटर की प्रस्तुति मोहन से महात्मा रही। इसमें बालक मोहन दास करमचंद के महात्मा बनने की कथा का भावपूर्ण मंच हुआ। पुतुल उत्सव की अंतिम प्रस्तुति में प्रकृति की महिमा में प्रकृति की महत्ता और मानव जीवन के लिए साफ सुथरे पर्यावरण की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। बनारस के अभिनव समिति प्रस्तुति का निर्देशन राजेंद्र श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान मुख्य अतिथि जीआई विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. रजनीकांत, राजेश कुमार गौतम, जयंत चौधरी, उमा नांदुरी आदि मौजूद रहे।
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