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BHU में चूहों पर शोध: लापरवाह जीवनशैली से पुरुषों में घट रही प्रजनन क्षमता, तनाव से शुक्राणु की कमी

Fri, 06 Jan 2023 06:48 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 06 Jan 2023 06:48 PM IST
सार

बीएचयू के वैज्ञानिकों ने चूहों पर किए एक शोध में पाया है कि लापरवाह जीवनशैली से पुरुषों में प्रजनन क्षमता घट रही है।  तनाव से शुक्राणु की कमी हो रही है। इस शोधा का प्रकाशन पुरुष प्रजनन शरीर विज्ञान के विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित जर्नल एन्ड्रोलोजीया में हुआ है। 
 

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Research on rats in BHU said Fertility decreasing in men due to careless lifestyle
BHU में चूहों पर शोध - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लापरवाह जीवनशैली (जीवन में तनाव, सही पोषण/आहार न मिलने, कैफीन का सेवन सहित कई तरह की लापरवाही) से पुरुषों में प्रजनन क्षमता घटती जा रही है। बीएचयू जीव विज्ञान विभाग के शिक्षक डॉ. राघव कुमार के निर्देशन में हुए शोध में यह परिणाम सामने आया। शोध टीम ने चूहों पर अध्ययन किया। इसका प्रकाशन पुरुष प्रजनन शरीर विज्ञान के विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित जर्नल एन्ड्रोलोजीया में हुआ है। 

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डॉ. राघव कुमार के निर्देशन में अनुपम यादव ने शोध किया है। डॉ. राघव ने बताया कि विभिन्न अनुसंधानों से पता चला है कि वैश्विक स्तर पर पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य में संकट का संकेत शुक्राणु की संख्या में गिरावट और पुरुष प्रजनन प्रणाली की असामान्यताओं में वृद्धि के प्रमाण से मिलता है। इसके अलावा और भी कई कारक हैं।

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चूहों पर 30 दिन तक शोध

बताया कि चूहों पर किए गए अध्ययन में पाया कि सब-क्रोनिक तनाव से ग्रस्त वयस्क चूहों में ऐसे लक्षण विकसित हुए जो प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। चूहों को 30 दिनों की अवधि के लिए हर दिन डेढ़ से तीन घंटे के लिए सब-क्रोनिक तनाव में रखा और शुक्राणु की गुणवत्ता और मात्रा को मापा।

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Research on rats in BHU said Fertility decreasing in men due to careless lifestyle
डॉ. राघव कुमार और अनुपम यादव - फोटो : अमर उजाला

देखने पर पता चला कि चूहों के दैनिक शुक्राणु उत्पादन में गंभीर गिरावट आई। इसके साथ ही शुक्राणु में रूपात्मक या संरचनात्मक असामान्यता भी देखने को मिली। विशेष रूप से एपिडीडिमल शुक्राणु (यह शुक्राणु पुरुष प्रजनन सहायक संरचनाओं में से एक में संग्रहित और परिपक्व होता है) तनाव के जोखिम से प्रतिकूल रूप से प्रभावित थे। इसके अलावा शुक्राणु की मूल संरचना में भी असामान्यता देखने को मिली।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि तनाव ने पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) संश्लेषण को भी बाधित किया और वृषण में ऑक्सीडेटिव तनाव (हानिकारक अणुओं और एंटी-ऑक्सीडेंट एंजाइमों के बीच असंतुलन) में भी वृद्धि की। डॉ. राघव कुमार मिश्रा ने कहा कि यह अध्ययन मनोवैज्ञानिक तनाव और प्रजनन कल्याण के संबंध में विश्लेषण के नए क्षेत्रों के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकता है। 

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