फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Research in bhu Rishyagandha is useful in preventing diabetes and cancer

शोध: मधुमेह व कैंसर से बचाव में उपयोगी है ऋष्यगंधा, बीएचयू की लैब में नैनो-बायोटेक्नोलॉजी तकनीक से उपजाई गई औषधीय किस्म

Sun, 27 Feb 2022 10:18 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 27 Feb 2022 10:18 PM IST
सार

वैज्ञानिकों का मानना है कि बाजार में कैंसर, मधुमेह रोग के लिए बहुत सी एलोपैथिक दवाइंया मौजूद हैं, लेकिन इन दवाओं के सेवन से शरीर में कई तरह के दुष्प्रभाव की शिकायतें भी आती हैं।

विज्ञापन
Research in bhu Rishyagandha is useful in preventing diabetes and cancer
बीएचयू की लैब में उपजाया गया ऋष्यगंधा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्वविद्यालय विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने नैनौ प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए लैब में ऋष्यगंधा की उच्च गुणवत्ता वाली किस्म उपजाई है। यह ऐसा औषधीय पौधा है, जिसका प्रयोग मधुमेह और कैंसर रोग से बचाव में उपयोगी है। बीएचयू वनस्पति विज्ञान विभाग और मॉलिक्यूलर एंड ह्यूमन जेनेटिक्स विभाग के बीच औषधीय पौधे ऋष्यगंधा पर हुए अंतर्विषयी शोध में बेहतर परिणाम आए हैं।
विज्ञापन


ऋष्यगंधा की गुणवत्ता पर आठ साल पहले शोध शुरू हुआ था, जो अब पूरा हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बाजार में कैंसर, मधुमेह रोग के लिए बहुत सी एलोपैथिक दवाइंया मौजूद हैं, लेकिन इन दवाओं के सेवन से शरीर में कई तरह के दुष्प्रभाव की शिकायतें भी आती हैं।
विज्ञापन


अब वैज्ञानिक तकनीक के साथ आयुर्वेदिक वनस्पतियों के प्रयोग से, एलोपैथिक दवाओं से ज्यादा कारगर प्राकृतिक तत्वों से दवाएं बनाना संभव हो रहा है। आयुर्वेदिक पद्धति में उल्लिखित ऋ ष्यगंधा एक ऐसा ही औषधीय पौधा है, जिसे सामान्य भाषा में पनीर का फूल या पनीर बंध एवं वैज्ञानिक भाषा में विधानिया कोअगुलंस के नाम से जाना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

वनस्पति विज्ञान विभाग में हुए शोध के बारे में प्रो. शशि पांडेय ने बताया कि ऋष्यगंधा सामान्य रूप से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के शुष्क एवं गर्म स्थानों पर पाया जाता है। इसको पनीर का फूल कहे जाने का कारण उसके बीजों में उपस्थित प्रोटीएज द्वारा दूध से पनीर बनाने की क्षमता होती है।

यह औषधीय गुण इसमें उपस्थित जैव सक्रिय रसायनिक टर्पेनॉयड्स यौगिकों जैसे विथानोलॉयड्स एवं कोअगुलिनोलॉयड्स के कारण होते हैं। परंतु इसके लापरवाहीपूर्ण रख-रखाव एवं अनियमित प्रयोग के कारण आज यह संकट ग्रस्त पौधों की श्रेणी में सम्मलित हो चुका है।

अब तक शोध के जो परिणाम आए हैं, उसका प्रकाशन शोध पत्रिकाओं मैटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग सी, प्लांट सेल रिपोर्ट्स एवं फिजियोलॉजी एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी ऑफ प्लांट्स में किया जा चुका है। शोध करने वाली टीम में विपिन मौर्या, लकी शर्मा, स्नेहा आदि शामिल हैं। 

लैब में ऐसे हुई औषधीय पौधे की उपज 

वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रोफेसर शशि पांडेय ने बताया कि आठ साल पहले शोध छात्रा दीपिका त्रिपाठी के साथ प्रयोग शुरू किया था। सबसे पहले प्रयोगशाला में ही कृत्रिम ऊतक संवर्धन विधि द्वारा संकट ग्रस्त पौधे ऋ ष्यगंधा के उत्पादन को बढ़ाया गया।

इसके साथ ही उन पौधों से सूक्ष्म नैनोकणों का संश्लेषण/निर्माण किया गया। मॉलिक्यूलर एंड ह्यूमन जेनेटिक्स विभाग के प्रो. जीनरायण के साथ शोध को आगे बढ़ाते हुए यह भी पाया कि संश्लेषित नैनोकणों में उच्च रूप से सरवाईकल कैंसर के प्रति निदान की क्षमता है।

भविष्य में इस विधि (नैनो-जैवप्रोद्योगिकी) द्वारा न केवल ऋष्यगंधा की संकट ग्रस्त स्थिति मे सुधार किया जाना संभव हो सकेगा बल्कि उसके औषधीय गुणों के उत्पादन में भी बढ़ावा मिलेगा, जिसका उपयोग मानव जीवन में विभिन्न प्रकार के रोगों को ठीक करने में संभव हो सकेगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed