Research: IMS BHU के शोध में कैंसर के 150 मरीजों में मिली मनोयौनवृत्ति की समस्या, 350 पर किया अध्ययन
शोध छात्रा आश्रुती पठानिया, केरल विश्वविद्यालय से अनुपमा थॉमस, क्षेत्रीय कैंसर केन्द्र, तिरुअनंतपुरम से रेखा शामिल हैं। यह कार्य अंतरराष्ट्रीय रूप से ख्याति प्राप्त शोध पत्रिका साइको-आंकोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।
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आईएमएस बीएचयू के सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग में कैंसर के मरीजों में मनोयौनवृत्ति (साइको सैक्सुअल डिसआर्डर) का पता लगाने के लिए 350 मरीजों पर शोध किया गया है।
18 साल से 60 साल तक के कैंसर मरीजों को शामिल किया गया, जिसमें 150 से अधिक मरीजों में इस तरह की समस्या मिली हैं। शोध करने वाले प्रोफेसर मनोज पांडेय के अनुसार संबंधित मरीज और उनकी पत्नी से साक्षात्कार भी किया गया। इसके बाद प्रमुख 10 वजह निकलकर सामने आई। इसमें कई वजह ऐसी है, जिसको काउंसिलिंग के माध्यम से दूर किया जा सकता है।
प्रो. मनोज पांडेय का कहना है कि शोध के माध्यम से एक ऐसा टूल बनाया गया है, जिसके माध्यम से समस्याओं को बहुत हद तक आसानी से जाना जा सकता है। इसको साइको सैक्सुअल इनवेंट्री नाम दिया गया है। इसमें करीब 40 से अधिक सवालों का संबंधित मरीज को जवाब देना होगा। उनके जवाबों के आधार पर ही यह जाना जा सकता है कि मनोयौनवृत्ति है कि नहीं।
प्रो. मनोज के अनुसार कैंसर के मरीजों में मनोयौनवृत्ति की समस्या अधिक होती है। एक तो उनकी खुद की बीमारी का डर फिर उसका इलाज करवाने की चिंता। पहले फेज में 100 और दूसरे फेज में 250 मरीजों को लिया गया। कैंसर के उपचार में आमतौर पर सर्जरी, लक्षित दवाएं, विकिरण या कीमोथेरेपी शामिल होती है।
ये जीवन रक्षक तो होती हैं लेकिन इस तरह के उपचार के बाद शारीरिक, मानसिक प्रभाव भी पड़ता है। इसमें संबंधित मरीज को तनाव, चिंता और अवसाद जैसी विकृतियां भी होती हैं। मनोयौन शिथिलता, जिसे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों के कारण बिगड़ी यौन स्वास्थ्य के रूप में परिभाषित किया जाता हैं।
इन वजहों से कैंसर के मरीजों को हो रही समस्या : नपुंसकता, शारीरिक असुविधाएं यौन संतुष्टि में बाधा डालती हैं, उदास और अवसादग्रस्त महसूस करना, थकान, भोजन ग्रहण न कर पाना।