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बभनियांव में मिल सकते हैं 3500 साल पहले के अवशेष
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वाराणसी। बभनियांव में खोदाई के दौरान जिस तरह से नई जानकारियां मिल रही हैं, उसको लेकर पुरातत्वविद काफी उत्साहित हैं। दो साल से चल रही खोदाई में जहां पूर्व में 3500 साल पुराने मिट्टी के बर्तन मिले थे, वहीं अब पुरातत्वविद यहां इससे पहले के समय के भी अवशेष मिलने की संभावना जता रहे हैं। पहले जहां खोदाई बंद हो गई थी, वहां नए सिरे से खोदाई शुरू कराया जाएगा।
बीएचयू प्राचीन इतिहास पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओएन सिंह के निर्देशन में दो साल से चल रही खोदाई में अब तक शिवमंदिर, मिट्टी के बर्तन सहित कई प्रमाण मिल चुके हैं। रविवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुराविद् प्रो. जेएन पाल और बीएचयू के प्रो. एके दूबे बभनियांव उत्खनन कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे। प्रो. अशोक सिंह ने बताया कि प्रो. पाल ने खोदाई के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा बीएचयू के पुरातत्वविद मिर्जामुराद स्थित भोर कला पुरास्थल पर पहुंचे। यहां भी जल्द ही खोदाई का काम शुरू कराया जाएगा। प्रो. अशोक ने बताया कि प्रो. पाल ने यहां संभावना जताई है कि 3500 साल के पहले के भी यहां अवशेष मिल सकते हैं। इससे पहले शनिवार को जो शिवमंदिर के पास उत्तर की ओर की दीवार मिली थी, उसके पास साफ-सफाई की गई।
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बीएचयू प्राचीन इतिहास पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओएन सिंह के निर्देशन में दो साल से चल रही खोदाई में अब तक शिवमंदिर, मिट्टी के बर्तन सहित कई प्रमाण मिल चुके हैं। रविवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुराविद् प्रो. जेएन पाल और बीएचयू के प्रो. एके दूबे बभनियांव उत्खनन कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे। प्रो. अशोक सिंह ने बताया कि प्रो. पाल ने खोदाई के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा बीएचयू के पुरातत्वविद मिर्जामुराद स्थित भोर कला पुरास्थल पर पहुंचे। यहां भी जल्द ही खोदाई का काम शुरू कराया जाएगा। प्रो. अशोक ने बताया कि प्रो. पाल ने यहां संभावना जताई है कि 3500 साल के पहले के भी यहां अवशेष मिल सकते हैं। इससे पहले शनिवार को जो शिवमंदिर के पास उत्तर की ओर की दीवार मिली थी, उसके पास साफ-सफाई की गई।
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