मुकदमों के बोझ से मिली राहत: राष्ट्रीय लोक अदालत में 89805 मामलों का निस्तारण, 32.13 करोड़ की समाधान राशि
राष्ट्रीय लोक अदालत में एक दिन में 89,805 मामलों का निस्तारण किया गया। विभिन्न मामलों में 32.13 करोड़ रुपये की समाधान राशि तय हुई। लोक अदालत में बैंक संबंधी मामलों से लेकर पारिवारिक विवादों तक का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निपटारा किया गया। मामलों के निस्तारण से अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ कम हुआ और पक्षकारों को राहत मिली।
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मुकदमों के लंबे इंतजार के बीच शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत कई लोगों के लिए राहत लेकर आई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित लोक अदालत में एक ही दिन में 89805 मामलों का अंतिम रूप से निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 32 करोड़ 13 लाख 59 हजार 534 रुपये की समाधान राशि रही। बड़ी संख्या में लोगों को वर्षों से चल रहे विवादों से समझौते के आधार पर छुटकारा मिला।
राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष रामसुलीन सिंह ने जनपद न्यायालय परिसर में किया। उन्होंने बैंकों की ओर से लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया और बैंक प्रतिनिधियों से अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण कर लोगों को राहत पहुंचाने का आह्वान किया।
लोक अदालत में आपराधिक शमनीय वाद, चेक बाउंस के मामले, बैंक ऋण वसूली, मोटर दुर्घटना प्रतिकर, पारिवारिक विवाद, श्रम, भूमि अधिग्रहण, विद्युत एवं जल बिल, सेवा संबंधी विवाद और अन्य सिविल मामलों का सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया।
जिला न्यायालयों में लंबित मामलों में 3429 प्रकरणों का निस्तारण हुआ। इनसे संबंधित जुर्माना एवं समाधान राशि 10 करोड़ 47 लाख 23 हजार 500 रुपये रही। वहीं, राजस्व न्यायालयों, अन्य न्यायालयों और विभागों में लंबित एवं प्री-लिटिगेशन के 85884 मामलों का निस्तारण किया गया।
इनमें 19 करोड़ 9 लाख 57 हजार 207 रुपये की समाधान राशि रही। इसके अलावा निजी एवं सार्वजनिक बैंकों के 492 मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें 2 करोड़ 56 लाख 78 हजार 827 रुपये की समाधान राशि रही। इस प्रकार न्यायालय, राजस्व विभाग और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े मामलों को मिलाकर लोक अदालत में कुल 89,805 प्रकरण निस्तारित किए गए।
राष्ट्रीय लोक अदालत के क्रम में 9 से 11 सितंबर तक आयोजित विशेष लोक अदालत में लघु अपराधों के 51 मामलों का भी निस्तारण किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राहुल ने बताया कि लोक अदालत में मामलों का निस्तारण आपसी सुलह और समझौते के आधार पर किया गया। इससे पक्षकारों को समय और धन की बचत के साथ लंबे मुकदमों से राहत मिली।