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कोरोना कर्फ्यू में ढील ने बढ़ाया हवा में जहर, प्रदेश का सातवां प्रदूषित शहर
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कोरोना कर्फ्यू में ढील के बाद बनारस में कानपुर और लखनऊ से भी ज्यादा प्रदूषण है। रविवार को बनारस का एयर क्वालिटी इंडेक्स 162 दर्ज किया गया वहीं लखनऊ का 100 और कानपुर का एक्यूआई 73 था। वायु प्रदूषण में प्रदेश में नोएडा पहले नंबर पर और वाराणसी का सातवां नंबर रहा।
कोरोना कर्फ्यू में ढील के बाद हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा फिर से बढ़ने लगी है। शहर में वाहनों की बढ़ती आवाजाही के कारण ग्रीन जोन में पहुंचा बनारस अब धीरे-धीरे येलो जोन से रेड जोन की तरफ बढ़ने लगा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 162 दर्ज किया गया। हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पीएम 2.5 की अधिकतम मात्रा 238, न्यूनतम 33 और औसत मात्रा 100 दर्ज की गई। पीएम 10 की अधिकतम मात्रा 236, न्यूनतम 99 और औसत मात्रा 156 रही।
सल्फर डाई आक्साइड की अधिकतम मात्रा 38, न्यूनतम मात्रा 30 और औसत मात्रा 21 रही। ओजोन की अधिकतम संख्या 162, न्यूनतम 4 और औसत मात्रा 162 रही। आईक्यू एयर के अनुसार अर्दली बाजार का एक्यूआई 124, नाटी इमली 94 और लंका का 71 दर्ज किया गया। 17 मई को आईक्यू एयर की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार नाटी इमली रोड का एक्यूआई 136, अर्दली बाजार का 126 और लंका का एक्यूआई 109 रहा।
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बढ़ी है धूल कण और प्रदूषक तत्वों की मात्रा
पीएम कणों की मात्रा में बढ़ोतरी का कारण यातायात और धूल कणों की संख्या में बढ़ोतरी को माना जा रहा है। बनारस में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे वाहनों के जाम और निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी को प्रमुख कारण माना गया था। निर्माण कार्य व सफाई के दौरान मानक का पालन न करने से प्रदूषण बढ़ गया था।
13 मई तक बनारस था ग्रीन जोन में
कोरोना कर्फ्यू के दौरान 13 मई तक बनारस ग्रीन जोन में पहुंच गया था। बनारस का एयर क्वालिटी इंडेक्स 42 दर्ज किया गया जो कि हर लिहाज से बेहतर था। 12 मई को एक्यूआई का यह आंकड़ा 69, 11 मई को 71 और 10 मई को 79 था। इसके बाद 14 मई से एयर क्वालिटी इंडेक्स बढना शुरू हुआ। 14 मई को एयर क्वालिटी इंडेक्स 135 पहुंच गया।
कोरोना कर्फ्यू से पहले पांच गुना था हवा में पार्टिकुलेट मैटर
कोरोना कर्फ्यू से पहले शहर की हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) सामान्य से चार से पांच गुना अधिक थे। पीएम महीन धूल के वो कण होते हैं जो आसानी से सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। पहली मार्च को पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 332 प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया था, जबकि इसकी सामान्य मात्रा 50 प्रति क्यूबिक मीटर होना चाहिए। इसी तरह पीएम 10 का सामान्य स्तर 100 प्रति क्यूबिक मीटर है, जबकि इसका स्तर 375 प्रति क्यूबिक मीटर रहा।
हवा का पैमाना
एक्यूआई का स्तर शून्य से 50 होने पर हवा की गुणवत्ता अच्छी मानी जाती है। 51 से 100 एक्यूआई वाली हवा संतोषजनक, 101 से 201 वाली मध्यम स्तर की खराब, 201 से 301 वाली खराब, 301 से 400 बेहद खराब और 401 से 500 एक्यूआई वाली हवा को पूरी तरह खतरनाक और जहरीला माना जाता है।
प्रदेश के टाप टेन प्रदूषित शहर
नोएडा 264
गाजियाबाद 249
ग्रेटर नोएडा 249
बुलंदशहर 225
मुजफ्फरनगर 220
गुरुग्राम 206
वाराणसी 162
लखनऊ 100
कानपुर 73
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कोरोना कर्फ्यू में ढील के बाद हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा फिर से बढ़ने लगी है। शहर में वाहनों की बढ़ती आवाजाही के कारण ग्रीन जोन में पहुंचा बनारस अब धीरे-धीरे येलो जोन से रेड जोन की तरफ बढ़ने लगा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 162 दर्ज किया गया। हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पीएम 2.5 की अधिकतम मात्रा 238, न्यूनतम 33 और औसत मात्रा 100 दर्ज की गई। पीएम 10 की अधिकतम मात्रा 236, न्यूनतम 99 और औसत मात्रा 156 रही।
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सल्फर डाई आक्साइड की अधिकतम मात्रा 38, न्यूनतम मात्रा 30 और औसत मात्रा 21 रही। ओजोन की अधिकतम संख्या 162, न्यूनतम 4 और औसत मात्रा 162 रही। आईक्यू एयर के अनुसार अर्दली बाजार का एक्यूआई 124, नाटी इमली 94 और लंका का 71 दर्ज किया गया। 17 मई को आईक्यू एयर की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार नाटी इमली रोड का एक्यूआई 136, अर्दली बाजार का 126 और लंका का एक्यूआई 109 रहा।
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बढ़ी है धूल कण और प्रदूषक तत्वों की मात्रा
पीएम कणों की मात्रा में बढ़ोतरी का कारण यातायात और धूल कणों की संख्या में बढ़ोतरी को माना जा रहा है। बनारस में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे वाहनों के जाम और निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी को प्रमुख कारण माना गया था। निर्माण कार्य व सफाई के दौरान मानक का पालन न करने से प्रदूषण बढ़ गया था।
13 मई तक बनारस था ग्रीन जोन में
कोरोना कर्फ्यू के दौरान 13 मई तक बनारस ग्रीन जोन में पहुंच गया था। बनारस का एयर क्वालिटी इंडेक्स 42 दर्ज किया गया जो कि हर लिहाज से बेहतर था। 12 मई को एक्यूआई का यह आंकड़ा 69, 11 मई को 71 और 10 मई को 79 था। इसके बाद 14 मई से एयर क्वालिटी इंडेक्स बढना शुरू हुआ। 14 मई को एयर क्वालिटी इंडेक्स 135 पहुंच गया।
कोरोना कर्फ्यू से पहले पांच गुना था हवा में पार्टिकुलेट मैटर
कोरोना कर्फ्यू से पहले शहर की हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) सामान्य से चार से पांच गुना अधिक थे। पीएम महीन धूल के वो कण होते हैं जो आसानी से सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। पहली मार्च को पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 332 प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया था, जबकि इसकी सामान्य मात्रा 50 प्रति क्यूबिक मीटर होना चाहिए। इसी तरह पीएम 10 का सामान्य स्तर 100 प्रति क्यूबिक मीटर है, जबकि इसका स्तर 375 प्रति क्यूबिक मीटर रहा।
हवा का पैमाना
एक्यूआई का स्तर शून्य से 50 होने पर हवा की गुणवत्ता अच्छी मानी जाती है। 51 से 100 एक्यूआई वाली हवा संतोषजनक, 101 से 201 वाली मध्यम स्तर की खराब, 201 से 301 वाली खराब, 301 से 400 बेहद खराब और 401 से 500 एक्यूआई वाली हवा को पूरी तरह खतरनाक और जहरीला माना जाता है।
प्रदेश के टाप टेन प्रदूषित शहर
नोएडा 264
गाजियाबाद 249
ग्रेटर नोएडा 249
बुलंदशहर 225
मुजफ्फरनगर 220
गुरुग्राम 206
वाराणसी 162
लखनऊ 100
कानपुर 73