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रेहन पर रग्घू: साहित्यकार डॉ. काशीनाथ सिंह बोले- अपने किरदारों को बोलते और बात करते देखना बेहद सुखद

Sat, 24 Jun 2023 06:32 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 24 Jun 2023 06:32 PM IST
सार

साहित्यकार डॉ. काशीनाथ सिंह के उपन्यास रेहन पर रग्घू का पहली बार किसी पुरुष के निर्देशन में नाटक का मंचन होने जा रहा है। प्रेसवार्ता में काशीनाथ सिंह ने कहा कि 
लेखक के किरदार जब उसकी आंखों के सामने मंच पर जीवंत होते हैं तो ऐसा लम्हा शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

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Rehan Par Ragghu Writer Dr Kashinath Singh said  It is very pleasant to see his characters speak
मीडिया से बात करते साहित्यकार डॉ. काशीनाथ सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपने किरदारों को बोलते, बात करते, उठते और बैठते देखना बेहद सुखद होता है। लेखक के किरदार जब उसकी आंखों के सामने मंच पर जीवंत होते हैं तो ऐसा लम्हा शब्दों में बयां करना मुश्किल है। मेरे उपन्यास रेहन पर रग्घू का नाट्य रूपांतरण भी कुछ ऐसा ही है। पहली बार किसी पुरुष के निर्देशन में नाटक का मंचन हो रहा है, नहीं तो अब तक तो केवल महिला निर्देशकों ने मेरे नाटकों का निर्देशन किया था। यह कहना है मशहूर साहित्यकार डॉ. काशीनाथ सिंह का।

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शनिवार को वाराणसी के बृजइन्क्वलेव स्थित आवास पर प्रेसवार्ता के दौरान डॉ. सिंह ने कहा कि ग्लोबलाइजेशन ने मनुष्य को भी वस्तु में बदल दिया। रेहन पर जमीन रहती थी लेकिन अब इंसान खुद रेहन पर है। इंसान का वस्तु के रूप में बदल जाना ग्लोबलाइजेशन का सबसे बड़ा अभिशाप है। आज सारे लोग इंसान नहीं रह गए हैं। सभी वस्तु में बदल गए हैं। कोई बचाने वाला नहीं है।

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एक जुलाई को होगा नाटक का मंचन

काशीनाथ सिंह बताया कि एक जुलाई को उनके नाटक रेहन पर रग्घू का मंचन सनबीम वरुणा के हॉरमोनी ऑडिटोरियम में किया जाएगा। दिल्ली की संस्था प्रस्ताव के कलाकारों ने नाटक को तैयार किया है।

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स्थानीय स्तर पर सेतु सांस्कृतिक केंद्र इसमें सहयोग कर रहा है। नाटक के निर्देशक राज नारायण दीक्षित ने बताया कि साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित रेहन पर रग्घू अकेले पड़ते जा रहे मनुष्य का यथार्थ चित्रण है। इस दौरान सेतु सांस्कृतिक केंद्र के सलीम राजा भी मौजूद रहे।

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