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Bismillah Khan: उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के मकबरे पर हनुमान चालीसा का पाठ कर पेश की खिराजे अकीदत
Thu, 21 Mar 2024 10:02 PM IST
अमन विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Thu, 21 Mar 2024 10:02 PM IST
सार
Bismillah Khan: उस्ताद के मकबरे पर सुबह उनके परिवार के अलावा अन्य लोगों ने गुलपोशी करने के बाद कुरानख्वानी और दुआख्वानी की। इसके बाद कलाकारों व नेताओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ। उस्ताद के सानिध्य में संगीत की बारीकियां सीखने वाली उनकी दत्तक पुत्री के रूप में प्रख्यात रहीं सोमा घोष ने उस्ताद के कब्र पर पुष्प चढ़ाने के बाद नतमस्तक होकर नमन किया। फिर हनुमान चालीसा का पाठ किया।
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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को खिराजे अकीदत पेश करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संगीत की पहली निनाद में शुमार शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की 108वीं जयंती पर उनके मुरीदों ने गुरुवार को दरगाहे फातमान स्थित उनके मकबरे पर खिराजे अकीदत पेश की। उनके मकबरे पर फूल चढ़ाए। वहीं, उनकी मुंहबोली पुत्री व उपशास्त्रीय गायिका सोमा घोष ने हनुमान चालीसा का पाठ कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उस्ताद की जिंदगी पर किताब लिखने वालीं शास्त्रीय गायिका व लेखिका प्रो. रीता गांगुली ने भी उस्ताद को अकीदत पेश की।
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उस्ताद के मकबरे पर सुबह उनके परिवार के अलावा अन्य लोगों ने गुलपोशी करने के बाद कुरानख्वानी और दुआख्वानी की। इसके बाद कलाकारों व नेताओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ। उस्ताद के सानिध्य में संगीत की बारीकियां सीखने वाली उनकी दत्तक पुत्री के रूप में प्रख्यात रहीं सोमा घोष ने उस्ताद के कब्र पर पुष्प चढ़ाने के बाद नतमस्तक होकर नमन किया। फिर हनुमान चालीसा का पाठ किया।
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उस्ताद को समर्पित बंदिश, तोहे देखे बिना मोहे नाहीं चौन... सुनाया। उन्होंने उस्ताद के साथ गुजारे वक्त को याद करते हुए कहा कि वह कहते थे संगीत में सब एक हैं। खुदा को पाने के लिए अलग-अलग धर्म की राह है लेकिन संगीत की एक ही राह है।
सोमा घोष ने कहा कि बाबा विश्वनाथ, बनारस और बिस्मिल्लाह एकाकार हैं। उस्ताद चले गए, मगर जब तक यह सृष्टि रहेगी तब तक दुनिया में उनकी शहनाई गूंजती रहेगी। पहली बार दोपहर में उस्ताद के मकबरे पर पहुंचीं प्रो. रीता गांगुली ने भी उन्हें पुष्प चढ़ाए। उन्होंने उनके परिजनों के साथ फोटो भी खिंचवाई। कहा कि संगीत की पहली निनाद सुषिर वाद्य में शामिल शहनाई के उपासक उस्ताद ने इसको ऐसा तरासा की, सिर्फ शुभ मुहूर्तों पर ही गूंजने वाली इस शहनाई को शास्त्रीय संगीत का ओहदा दिलाया।
इस दौरान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के पुत्र शांतनु राय, उस्ताद बिस्मिल्लाह खां फाउंडेशन के सचिव एवं उस्ताद के पोते अफाक हैदर, संयोजक शकील अहमद जादूगर, अब्बास मुर्तुजा शम्शी, उस्ताद की बड़ी बेटी जरीना बेगम, मिन्हाज फातमा सहित उनके परिवार अन्य सदस्य मौजूद रहे।