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जीआई उत्पादों के लिए कच्चे माल की नहीं होगी किल्लत, काशी में बनेगा रॉ मैटेरियल बैंक

Sat, 06 Feb 2021 01:26 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 06 Feb 2021 01:26 AM IST
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raw material bank gi
वाराणसी। देश विदेश तक अपने हुनर से काशी का मान बढ़ा रहे हस्तशिलिपियों के समक्ष अब कच्चे माल की किल्लत नहीं होगी। गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के उत्पादन में आने वाली कच्चे माल की बाधाओं को स्थानीय स्तर पर दूर कराने को लेकर काशी में रॉ मैटेरियल बैंक की स्थापना की जाएगी। यही नहीं, जीआई उत्पादों को बढ़ावा देने को लेकर ऑनलाइन मार्केटिंग की भी व्यवस्था की जाएगी। ताकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीआई उत्पादों का निर्यात किया जा सके। उक्त जानकारी कमिश्नर सभागार में शुक्रवार को डिजाइन डेवलपमेंट प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने दी।
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कमिश्नर ने बताया कि काशी में रॉ मैटेरियल बैंक की स्थापना होने से हस्त शिल्पी और अच्छे से गुणवतापूर्ण उत्पाद तैयार कर सकेंगे। सॉफ्ट स्टोन से बनने वाले स्टोन कार्विंग जीआई उत्पादों के लिए बुंदेलखंड के खदान से आने वाले पत्थर की कमी नहीं होंगी। पिछले दिनों शिल्पियों ने कच्चे माल की किल्लत को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। नई तकनीकी को अपनाते हुए आकर्षक डिजाइन और पैकेजिंग के साथ-साथ उसके ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। काशी में बनने वाले इन जीआईपी उत्पादों की मांग बाजार में अधिक है। इन सामानों की आकर्षक डिजाइनिंग व पैकेजिंग कराकर इसे राष्ट्रीय बाजार के साथ ही साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी निर्यात किया जाएगा।
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87 हस्तशिल्पी को मिले प्रमाणपत्र
15 दिवसीय डिजाइन डेवलपमेंट प्रशिक्षण व पैकेजिंग कार्यक्रम के दौरान 87 हस्तशिल्पियों को प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वुडेन कार्विंग, स्टोन कार्विंग, जरी जरदोजी व गुलाबी मीनाकारी का कार्य करने वाले स्थानीय हस्तशिलिपियों को प्रशिक्षण दिया गया था। कमिश्नर ने संयुक्त आयुक्त उद्योग उमेश सिंह को निर्देशित करते हुए कहा कि स्टोन कार्विंग व वुडेन कार्विंग का कार्य करने वाले हस्तशिलिपियों को कार्य के दौरान उड़ने वाले डस्ट एवं बुरादे के साइड इफेक्ट से बचाने के लिए मास्क आदि की डिजाइनिंग की व्यवस्था कराएं। इस दौरान उद्यमियों द्वारा अपने-अपने घरों में ही कुटीर उद्योग के रूप में आधा एवं एक हॉर्स पावर की मशीन लगाकर कार्य करने के लिए घरेलू विद्युत कनेक्शन की मांग की।
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