Ravidas Jaynti: बनारस पहुंचे पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह, बोले- धर्मों में लड़ाने वाले लोगों से खतरा
संत शिरोमणि रविदास की जयंती पांच फरवरी को माघी पूर्णिमा के दिन मनाई जाएगी। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष व पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल शनिवार को वाराणसी पहुंचे।
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संत रविदास की जयंती पर वाराणसी के सीरगोवर्धनपुर स्थित संत रविदास मंदिर में होने वाले आयोजन में शामिल होने के लिए शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष व पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल शनिवार को वाराणसी पहुंचे। संत रविदास मंदिर में मत्था टेकने और लंगर छकने के बाद मीडिया से बातचीत की। कहा कि वाराणसी आने वाले लोग काफी भाग्यशाली होते हैं।
एक सवाल के जवाब में कहा कि इस देश में सारे धर्मों के लोग रहते हैं। सबका सत्कार किया जाए। सारे धर्मों को एक बनाकर लाया जाए, तभी देश आगे बढ़ेगा।। एक धर्म को दूसरे धर्म से लड़ाने वालों से खतरा है। धर्मों में लड़ाने वाले कभी नहीं चाहेंगे कि देश तरक्की करे।
संत रविदास नाम पर बन रहे कॉरिडोर पर जताई खुशी
सुखबीर सिंह बादल ने आगे कहा कि बनारस की धरती बड़ी पवित्र है। यह गुरुओं की नगरी है। यहां देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं। संत रविदास की जयंती पर हजारों की संख्या में यहां आईं हैं। हर कोई अपना तीर्थ पूरा करने आया है। वहीं उन्होंने संत रविदास नाम पर बन रहे कॉरिडोर पर प्रसन्नता जाहिर की। कहा कि यह अच्छी बात है।
इससे पहले उन्होंने संत रविदास की चरणों में शीश नवाया और संत निरंजन दास के आशीर्वाद लिए। संत निरंजन दास शुक्रवार शाम ही वाराणसी पहुंचे हैं। सुखबीर सिंह बादल ने ट्वीट किया, मैं बहुत भाग्यशाली हूं गुरु रविदास जी की जन्मस्थली पर मत्था टेका। कृपा रही कि संत निरंजन दास का भी आशीर्वाद मिला।
बेगमपुरा बन गया सीरगोवर्धनपुर का इलाका
संत रविदास की जन्मस्थली सीरगोवर्धनपुर का पूरा इलाका संत के सपनों के गांव बेगमपुरा में तब्दील हो गया है। संत निरंजन दास के पहुंचने के साथ ही मेला क्षेत्र भी गुलजार हो गया। मंदिर से लेकर गेस्ट हाउस तक रंग-बिरंगी रोशनी, अमृतवाणी और कीर्तन का पाठ गूंज रहा था। संत शिरोमणि रविदास की जयंती पांच फरवरी को माघी पूर्णिमा के दिन मनाई जाएगी।
शुक्रवार को सीरगोवर्धनपुर का इलाका संगतों से गुलजार हो गया। जयंती में शामिल होने के लिए हरियाणा, पंजाब, जालंधर के साथ ही देश के कई राज्यों से संगत पहुंची है। विदेश से भी एनआरआई भक्त पहुंचे हैं। सेवा के लिए साढ़े सात हजार से अधिक सेवादारों की ड्यूटी तीन शिफ्ट में लगाई गई है। जयंती के दिन होने वाले मुख्य सत्संग के लिए पंडाल का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। 80 मजदूरों की टीम इसे आकार दे रही है। मालवा लंगर कमेटी की तरफ से संत रविदास विद्यालय में लंगर शुरू कर दिया गया।