रंगभरी एकादशी कल: बनारस में 15 को चिता भस्म की होली, 51 वाद्ययंत्रों से होगी महाश्मशान नाथ की आरती
महाश्मशाननाथ सेवा समिति के व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने बताया कि फाल्गुल शुक्ल द्वादशी को महाश्मशान पर चिता भस्म के साथ होली खेली जाती है। शिवपुराण और दुर्गा सप्तशती में भी चिता भस्म की होली का उल्लेख मिलता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रंगभरी एकादशी पर काशीवासियों के साथ रंगभरी होली खेलने के बाद दूसरे दिन भगवान शिव अपने गणों के संग महाश्मशान में चिता भस्म से होली खेलते हैं। इस बार मसान की होली में ब्रज और द्वारिका के रंग भी घुलेंगे। रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन महाश्मशान पर होने वाली चिता भस्म की होली इस साल 15 मार्च को और भव्य रूप में मनाई जाएगी।
अपराह्नन 11:30 बजे से प्रारंभ होकर 12 बजे आरती के साथ ही मसाने की होली शुरू होगी। द्वारिका से आए संदेश के चलते इस वर्ष श्री कृष्ण के पसंद के रंगों को भी मसाने की होली में शामिल कर भस्म के साथ दिव्य होली खेली जाएगी। महाश्मशाननाथ सेवा समिति के व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने बताया कि फाल्गुल शुक्ल द्वादशी को महाश्मशान पर चिता भस्म के साथ होली खेली जाती है।
नियमित कार्यक्रम के तहत आदि देव शंकर दोपहर में स्नान के लिए मणिकर्णिका तीर्थ पर पहुंचते हैं। स्नान के बाद महाश्मशान नाथ की आरती और बाबा को भस्म अर्पित किया जाता है। फिर 51 वाद्ययंत्रों के बीच आरती होती है। उसके बाद जलती चिताओं के साथ भोलेनाथ अपने प्रिय विशिष्ट भक्तों के साथ चिता भस्म की होली खेलते हैं। शिवपुराण और दुर्गा सप्तशती में भी चिता भस्म की होली का उल्लेख मिलता है।
रंगभरी के लिए बदला सप्तर्षि और भोग आरती का समय
रंगभरी एकादशी पर श्री काशी विश्वनाथ की आरती के समय में बदलाव किया गया है। 14 मार्च को होने वाले रंगभरी के उत्सव पर भगवान शिव एवं पार्वती की चल प्रतिमाओं का भव्य शृंगार किया जाएगा। शाम को सात बजे होने वाली सप्तर्षि आरती रंगभरी के दिन अपराह्न तीन बजे होगी। रात्रि नौ बजे होने वाली शृंगार भोग आरती अपराह्नन पांच बजे प्रारंभ होगी। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट रात्रि 11:30 बजे तक दर्शन के लिए खुले रहेंगे। ब्यूरो
गौरा को ससुराल के नियम समझाने के साथ गाए गए मंगल गीत
चला हो गौरा ऊंचे पहड़वा, तोहरा के भोला बोलउले बा... की धुन गौरा के मायके में तब्दील हो चुके महंत आवास पर गूंजते रहे। बाबा के गौने की रस्म उत्सव का उल्लास शनिवार को पूरी रौ में रहा। रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ मां गौरा की विदाई कराने के लिए कैलाश से काशी आएंगे।
शनिवार को टेढ़ी नीम स्थित विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर उत्सव का रंग और भी चटख हो गया। गौरा के रजत विग्रह को संध्याबेला में हल्दी लगाई गई। महंत आवास पर गौरा के विग्रह के समक्ष सुहागिनों और गवनहिरयों की टोली ने मंगल गीत गाए। उत्सव में ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक के बीच मंगल गीत गाते हुए महिलाओं ने गौरा को ससुराल के नियम समझाए।
मांगलिक गीतों से महंत आवास गुंजायमान हो उठा। लोक संगीत के बीच-बीच शिव-पार्वती के मंगल दांपत्य की कामना पर आधारित पारंपरिक गीतों का क्रम देर तक चला। मंगल गीतों में तैयारियों पर भी चर्चा हुई। भोले बाबा के आगमन के लिए महंत आवास पर तैयारियां की जा रही हैं। ठंडई, मेवे और पकवान तैयार कराए जा रहे हैं।