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श्री चित्रकूट रामलीला के मंच पर हुआ राज्याभिषेक प्रसंग का मंचन

Mon, 12 Oct 2020 01:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 12 Oct 2020 01:12 AM IST
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ramleela in varanasi
राम के राज्यभिषेक की तैयारी को लेकर अवध में जहां बधावे बज रहे थे, वहीं साज-बाज, बधाई-उत्सव पर मंथरा की कुमति ने एक झटके में पानी फेर दिया। राजतिलक की तैयारी देख कैकेयी के पास पहुंची मंथरा ने उसे याद दिलाया कि तुम्हारे दो वरदान राजा दशरथ के पास पड़े हुए हैं। इसी मौके पर भरत को राजगद्दी और राम को वनवास मांग कर अपनी छाती ठंडी कर लो।
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श्री चित्रकूट रामलीला समिति की ओर से रविवार को अयोध्या भवन में लीला की शुरुआत हुई। राजा दशरथ दर्पण में अपने केस निहारते हुए गुरु वशिष्ठ से कहते हैं कि अब हमारे बाल सफेद हो गए। राम को युवराज बना दिया जाना चाहिए। गुरु वशिष्ठ कहते हैं कि इसमें तनिक भी देरी करने की जरूरत नहीं है। तैयारी शुरू करा दी जाती है। वशिष्ठ राम को दशरथ के मन की बात बताते हैं।
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उधर, इंद्र के कहने पर सरस्वती अयोध्या जाकर मंथरा की बुद्धि फेर कर वापस चली आती हैं। अवध में छाई खुशी और बधावा के बारे में पूछने पर मंथरा को जब पता चलता है कि राम का राज तिलक होने वाला है तो उसका कलेजा जल उठता है। वह कैकेयी को समझाती है कि वह इसी मौके पर दशरथ से अपने दोनों वरदान मांग ले। कैकेयी मंथरा के समझाने के बाद कोप भवन में चली जाती है।
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आदि लाटभैरव की सांकेतिक रामलीला शुरू
तुलसी के दौर की गवाह आदि लाटभैरव रामलीला का शुभारंभ रविवार को हुआ। कोविड-19 के मद्देनजर इस बार लीला का मंचन न करके सिर्फ रामचरित मानस का पाठ रामायणी मंडल ने किया। रामलीला के अध्यक्ष डॉ. राम अवतार पांडेय ने बताया इस बार धनेसरा मठ में हर रोज रामलीला के प्रसंग के अनुसार रामायण का पाठ मृदंग की थाप व मंजीरे की धुन पर रामायणी मंडल करेंगे। संयोजन प्रधानमंत्री कन्हैया लाल यादव एडवोकेट, केवल कुशवाहा, रामप्रसाद, निखिल त्रिपाठी, रुद्र, शिवम अग्रहरि, बाबू सोनकर ने किया।

लीला प्रेमियों में छाई उदासी
आदि लाटभैरव रामलीला का मंचन नहीं होने से लीला स्थल पर पहुंचे नेमियों में उदासी छाई रही। रामलीला प्रेमियों ने बताया कि पूरे साल रामलीला का इंतजार रहता था। लेकिन इस बार लीला मंचन न होने से उदासीनता बनी हुई है।
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