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घरों में ही अदा की जाएगी अलविदा जुमे की नमाज
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रमजान उल मुबारक में अलविदा के जुमे की नमाज आज अदा की जाएगी। कोरोना कर्फ्यू के कारण प्रशासन ने मुस्लिम बंधुओं से अलविदा जुमे की नमाज घरों से ही अदा करने की अपील की है। प्रशासन के निर्देश के बाद मस्जिदों से भी रोजेदारों से घरों से नमाज अदा करने की अपील देर शाम को जारी गई।
बृहस्पतिवार को पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश के निर्देश पर पुलिस उपायुक्त काशी जोन अमित कुमार और पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन विक्रांत वीर ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से वर्चुअल संवाद किया। अधिकारियों ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से धार्मिक स्थल पर सभा नहीं करने और मस्जिद में अलविदा की नमाज के दौरान भीड़ न इकट्ठा करने के निर्देश दिए हैं। धर्मगुरुओं ने भी पुलिस प्रशासन को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
मस्जिदों में रहने वाले ही अलविदा जुमे की नमाज अदा करेंगे। सभी रोजेदारों से अपील की गई है कि वह अपने-अपने घरों में ही अलविदा जुमे की नमाज अदा करें। रमजान के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहले 10 दिन रहमत और बरकत के होते हैं तो अगले 10 दिन मगफिरत की इबादत होती है। आखिरी 10 दिनों में जहन्नुम की आग से छुटकारे की दुआ की जाती है। इस दौरान शब ए कद्र भी आती है। मस्जिदों में लोग एतकाफ में बैठे हुए हैं और वह चांद का दीदार करने के बाद ही एतकाफ से उठेंगे।
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शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि मस्जिदों से सभी लोगों से अपील की गई है कि वह घर से ही अलविदा की नमाज अदा करें। अलविदा का जुमा इसलिए खास होता है कि इस मुबारक महीने का ये आखिरी जुमा होता है, इसके बाद ही रोजेदारों को खुशियां देने के लिए ईद उल फितर का त्योहार आता है। मुस्लिम भाई जुमा अलविदा की नमाज को घर पर ही अदा करें।
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बृहस्पतिवार को पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश के निर्देश पर पुलिस उपायुक्त काशी जोन अमित कुमार और पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन विक्रांत वीर ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से वर्चुअल संवाद किया। अधिकारियों ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से धार्मिक स्थल पर सभा नहीं करने और मस्जिद में अलविदा की नमाज के दौरान भीड़ न इकट्ठा करने के निर्देश दिए हैं। धर्मगुरुओं ने भी पुलिस प्रशासन को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
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मस्जिदों में रहने वाले ही अलविदा जुमे की नमाज अदा करेंगे। सभी रोजेदारों से अपील की गई है कि वह अपने-अपने घरों में ही अलविदा जुमे की नमाज अदा करें। रमजान के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहले 10 दिन रहमत और बरकत के होते हैं तो अगले 10 दिन मगफिरत की इबादत होती है। आखिरी 10 दिनों में जहन्नुम की आग से छुटकारे की दुआ की जाती है। इस दौरान शब ए कद्र भी आती है। मस्जिदों में लोग एतकाफ में बैठे हुए हैं और वह चांद का दीदार करने के बाद ही एतकाफ से उठेंगे।
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शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि मस्जिदों से सभी लोगों से अपील की गई है कि वह घर से ही अलविदा की नमाज अदा करें। अलविदा का जुमा इसलिए खास होता है कि इस मुबारक महीने का ये आखिरी जुमा होता है, इसके बाद ही रोजेदारों को खुशियां देने के लिए ईद उल फितर का त्योहार आता है। मुस्लिम भाई जुमा अलविदा की नमाज को घर पर ही अदा करें।