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नहीं रहे पद्मश्री प्रो. राम शंकर त्रिपाठी, दो बार मिल चुका है राष्ट्रपति पुरस्कार
Mon, 18 Feb 2019 11:00 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 18 Feb 2019 11:00 PM IST
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प्रो. रामाशंकर त्रिपाठी नहीं रहे
- फोटो : अमर उजाला
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पद्म श्री सम्मान से सम्मानित प्रो. रमाशंकर त्रिपाठी(90) का सोमवार की शाम को कार्डियक अरेस्ट के चलते निधन हो गया। उन्हें वाराणसी में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनका निधन हुआ है।
उनके निधन से तिब्बती संस्थान सहित संस्कृत के विद्वानों में शोक की लहर है।
परिजनों ने बताया कि प्रोफेसर का स्वास्थ्य पिछले 2 दिन से खराब था। जिसके चलते उनको एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
प्रोफेसर बौद्ध दर्शन व पाली भाषा के प्रख्यात विद्वान थे। उनको राष्ट्रपित शंकर दयाल शर्मा और प्रतिभा देवी सिंह पाटिल भी सम्मानित कर चुकी थीं। इसके बाद उन्हें 2009
में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।
दर्जन भर से अधिक साहित्य लिख चुके थे। जिनमें मुख्यत: बौद्ध दर्शन प्रस्थान:, गुरु यमन्तभर्न्द मुखागम, आत्मयोजनासंहिता आदि ग्रंथ संस्कृत में तथा पाली भाषा में लिखे हुए हैं। इसके अलावा तिब्बती संस्थान के संस्थापक सदस्य भी रहे।
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उनके निधन से तिब्बती संस्थान सहित संस्कृत के विद्वानों में शोक की लहर है।
परिजनों ने बताया कि प्रोफेसर का स्वास्थ्य पिछले 2 दिन से खराब था। जिसके चलते उनको एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
प्रोफेसर बौद्ध दर्शन व पाली भाषा के प्रख्यात विद्वान थे। उनको राष्ट्रपित शंकर दयाल शर्मा और प्रतिभा देवी सिंह पाटिल भी सम्मानित कर चुकी थीं। इसके बाद उन्हें 2009
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में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।
दर्जन भर से अधिक साहित्य लिख चुके थे। जिनमें मुख्यत: बौद्ध दर्शन प्रस्थान:, गुरु यमन्तभर्न्द मुखागम, आत्मयोजनासंहिता आदि ग्रंथ संस्कृत में तथा पाली भाषा में लिखे हुए हैं। इसके अलावा तिब्बती संस्थान के संस्थापक सदस्य भी रहे।
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उन्होंने बौद्घ धर्म दर्शन के प्रचार-प्रसार के लिए सिक्कम और लेह लद्दाख तक की यात्राएं की।
मध्यप्रदेश के निवासी थे प्रो. त्रिपाठी
संस्कृत विश्वविद्यालय में अध्यापन के बाद वह केंद्रीय तिब्बती उच्च शिक्षा संस्थान में सेवाएं दे रहे थे। उनके निधन के बाद सोमवार की शाम कुलपति प्रो. गेसे नवांग समतेन सहित कई प्रोफेसर सारनाथ स्थित आवास पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। उनका अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
मध्यप्रदेश के निवासी थे प्रो. त्रिपाठी
संस्कृत विश्वविद्यालय में अध्यापन के बाद वह केंद्रीय तिब्बती उच्च शिक्षा संस्थान में सेवाएं दे रहे थे। उनके निधन के बाद सोमवार की शाम कुलपति प्रो. गेसे नवांग समतेन सहित कई प्रोफेसर सारनाथ स्थित आवास पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। उनका अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया।