{"_id":"828ae22542f8fb5da384e374c87c6618","slug":"ram-of-literature-met-1500-scripts-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"राम साहित्य की 1500 पांडुलिपियां मिलीं ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राम साहित्य की 1500 पांडुलिपियां मिलीं
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 31 Aug 2015 02:11 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मर्यादा के प्रतीक भगवान राम को जानने के लिए आने वाले दिनों में दुनिया काशी का रुख करेगी। करीब साढ़े पांच सौ साल पहले काशी में संत तुलसी ने गंगा के जिस तट पर रामचरित मानस की रचना आरंभ की थी, उसी तुलसी घाट पर राम के चरित्र पर आधारित साहित्य का सबसे बड़ा संग्रहालय खोलने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
विज्ञापन
इसके लिए देश ही नहीं द. एशिया और यूरोपीय देशों की भी यात्राएं की जा रही हैं ताकि राम से संबंधित साहित्य या ग्रंथ जहां कहीं भी हों उसकी जानकारी यहां संकलित की जा सके। अब तक 17 तरह के रामायण के अलावा कुल 1500 से अधिक पांडुलिपियों का संग्रह किया जा चुका है।
विज्ञापन
पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए प्रस्तावित गोस्वामी तुलसी दास संग्रहालय 2017 तक खोल दिया जाएगा। संग्रहालय के लिए पूर्व राज-रियासतों के अलावा देश के पांडुलिपि विशेषज्ञों और लेखकों से संपर्क किया जा रहा है।
विज्ञापन
अखाड़ा गोस्वामी तुलसी दास की ओर से पांडुलिपि विशेषज्ञ पं. उदय शंकर दुबे के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई है जो सिर्फ राम पर आधारित साहित्य की खोज कर रही है। अबतक रामायण की 14 पांडुलिपियां ढूंढी जा चुकी हैं। इनमें एक रामायण तो सात कांड का है लेकिन शेष 13 पांडुलिपियां अपूर्ण हैं।
इन पांडुलिपियों की अवधि 400 से 128 साल तक पुरानी बताई जा रही है। इसमें बरवै रामायण भी है और भदोही के शिवव्रत लाल की रचित उर्दू रामायण भी। उर्दू रामायण का प्रकाशन लाहौर के हाफटोन प्रेस से 1910 में कराया गया था। इसके अलावा अवध विलास, विनय पत्रिका, हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक समेत कुल 1500 पांडुलिपियों का बड़ा संग्रह अब तक किया जा चुका है।
संग्रहालय के निर्माण के लिए अब तक पांच देशों की यात्रा की जा चुकी है। इसमें बर्लिन, कनाडा, कुवालालांपुर, स्टाकहोम, यूएई के पांडुलिपि संग्रहालयों का दौरा किया गया है। पांडुलिपि विशेषज्ञ पं. उदयशंकर दुबे ने बताया कि कुछ पूर्व के राजपरिवारों के यहां जो पांडुलिपियां पड़ी हैं, उन्हें भी संग्रहालय के लिए दान करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह राम साहित्य पर आधारित विश्व का सबसे बड़ा संग्रहालय होगा।
संग्रहालय की कोर कमेटी के सदस्य डॉ. विजय नाथ मिश्र कहते हैं कि जल्द ही संग्रहालय बन कर तैयार हो जाएगा। इसकी आलमारियां टीकवुड की होंगी, शीशे बुलेट प्रूफ लगाए जाएंगे। कनाडा की अंतेरियो लाइब्रेरी की कुछ खूबियों को इसमें शामिल किया जा रहा है। एक क्लिक पर पांडुलिपियां डिसप्ले बोर्ड पर भी देखी जा सकेंगी।