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महिला सशक्तीकरण की दिशा में बढ़ रहा प्रदेशः राम नाईक
Sun, 23 Dec 2018 10:15 AM IST
shashikant misra
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बलिया
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Published by: shashikant misra
Updated Sun, 23 Dec 2018 10:15 AM IST
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राज्यपाल राम नाईक
- फोटो : amar ujala
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यूपी के बलिया में जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के द्वितीय स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल राम नाईक व विशिष्ट अतिथि डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा शामिल हुए।
शनिवार को हुए समारोह में राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि पहली बार प्रदेश के सभी 28 विश्वविद्यालयों में निर्धारित समय पर दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ। जिसमें कुल 12 लाख 79 हजार छात्रों को उपाधियां दी गईं। उपाधियां लेने वालों में 56 फीसदी छात्राएं रहीं, जिससे यह साबित हो रहा है कि महिला सशक्तीकरण की दिशा में प्रदेश बढ़ रहा है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, पं. दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विश्वविद्यालय व छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय में उपाधियां पाने वालों में छात्राओं की संख्या 80 फीसदी से अधिक है। उन्होंने इस अवसर पर अपनी पुस्तक चरैवेति चरैवेति का जिक्र करते हुए कहा कि सफलता के लिए चलते रहो-चलते रहो।
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स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने विश्वविद्यालय का नामकरण चंद्रशेखर के साथ की यादों को भी ताजा किया। उन्होंने कहा कि उनके विचारों, कृतित्व व व्यक्तित्व के अनुसार विश्वविद्यालय में शिक्षा का उत्तम माहौल बनाना चाहिए। उनकी ओर से विश्वविद्यालयीय प्रतिस्पर्धा की व्यवस्था की गई है।
प्रयास हो कि यह विश्वविद्यालय पहले स्थान पर पहुंच जाए। पूर्व के सालों में प्रदेश के विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह का कभी भी समय से आयोजन नहीं किया गया, यही कारण है कि ऐसे विश्वविद्यालय हैं जो सौ साल से अधिक हो चुके हैं लेकिन दीक्षांत समारोह कहीं 50वां तो कहीं 70वां रहा।
इस साल प्रदेश के सभी 28 विश्वविद्यालयों में निर्धारित समय पर दीक्षांत समारोह आयोजित किए गए। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयीय परीक्षा को नकल विहीन कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए और यही कारण रहा कि इस साल तीन लाख छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी।
स्थापना दिवस पर परिसर में पंडित हजारी प्रसाद द्विवेदी भोजपुरी केंद्र, इतिहास संग्रहालय, पं. दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ व अतिथि गृह का लोकार्पण शनिवार को राज्यपाल राम नाईक व उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने किया।
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शनिवार को हुए समारोह में राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि पहली बार प्रदेश के सभी 28 विश्वविद्यालयों में निर्धारित समय पर दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ। जिसमें कुल 12 लाख 79 हजार छात्रों को उपाधियां दी गईं। उपाधियां लेने वालों में 56 फीसदी छात्राएं रहीं, जिससे यह साबित हो रहा है कि महिला सशक्तीकरण की दिशा में प्रदेश बढ़ रहा है।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, पं. दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विश्वविद्यालय व छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय में उपाधियां पाने वालों में छात्राओं की संख्या 80 फीसदी से अधिक है। उन्होंने इस अवसर पर अपनी पुस्तक चरैवेति चरैवेति का जिक्र करते हुए कहा कि सफलता के लिए चलते रहो-चलते रहो।
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स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने विश्वविद्यालय का नामकरण चंद्रशेखर के साथ की यादों को भी ताजा किया। उन्होंने कहा कि उनके विचारों, कृतित्व व व्यक्तित्व के अनुसार विश्वविद्यालय में शिक्षा का उत्तम माहौल बनाना चाहिए। उनकी ओर से विश्वविद्यालयीय प्रतिस्पर्धा की व्यवस्था की गई है।
प्रयास हो कि यह विश्वविद्यालय पहले स्थान पर पहुंच जाए। पूर्व के सालों में प्रदेश के विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह का कभी भी समय से आयोजन नहीं किया गया, यही कारण है कि ऐसे विश्वविद्यालय हैं जो सौ साल से अधिक हो चुके हैं लेकिन दीक्षांत समारोह कहीं 50वां तो कहीं 70वां रहा।
इस साल प्रदेश के सभी 28 विश्वविद्यालयों में निर्धारित समय पर दीक्षांत समारोह आयोजित किए गए। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयीय परीक्षा को नकल विहीन कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए और यही कारण रहा कि इस साल तीन लाख छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी।
स्थापना दिवस पर परिसर में पंडित हजारी प्रसाद द्विवेदी भोजपुरी केंद्र, इतिहास संग्रहालय, पं. दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ व अतिथि गृह का लोकार्पण शनिवार को राज्यपाल राम नाईक व उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने किया।
शोध के लिए विश्वविद्यालय को मिलेंगे हर साल 50 लाख
डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा
- फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा ने कहा कि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में शोध के लिए हर साल 50 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। विश्वविद्यालय के विकास के लिए शासन पूरी तरह कटिबद्ध है, इसके मद्देनजर विकास के लिए प्रस्तावित धनराशि को भी अवमुक्त कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालय एक्ट लाएंगे, जिसमें संचालन को स्वतंत्रता तो होगी लेकिन स्वच्छंदता नहीं। 47 और महाविद्यालय खोलेंगे, जिसमें 26 मॉडल कॉलेज होंगे। इस विश्वविद्यालय के विकास के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी।
परिसर में स्थापित पं. दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के विकास के लिए वह डेढ़ करोड की धनराशि देने की घोषणा करते हैं। यह धनराशि हर साल 50 लाख के तौर पर उपलब्ध कराए जाएगी। इस विश्वविद्यालय के लिए सभी पदों की स्वीकृति की गई है जो बीते 25 सालों में किसी ने किसी विश्वविद्यालय के लिए नहीं किया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की मांग अन्य जनपदों के कॉलेजों को संबद्घ करने की मांग पर कहा कि इसके लिए कमेटी बना दी गई है और जल्द ही इसका समाधान कर दिया जाएगा ताकि विश्वविद्यालय की आमदनी कम न हो। सभी विश्वविद्यालय को शोध गंगा पोर्टल बनाने का निर्देश दिया गया है विश्वविद्यालय के शोध पर इसे डालें।
यह भी कहा कि इसे एक-दूसरे विश्वविद्यालय की शोध को देख कर नया कर सकेंगे। कहा कि शिक्षा का स्तर सुधारने व नकल विहीन परीक्षा कराने का काम किया और इसके लिए संसाधनों का प्रयोग किया और इससे छात्र व शिक्षक का उत्पीड़न नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालय एक्ट लाएंगे, जिसमें संचालन को स्वतंत्रता तो होगी लेकिन स्वच्छंदता नहीं। 47 और महाविद्यालय खोलेंगे, जिसमें 26 मॉडल कॉलेज होंगे। इस विश्वविद्यालय के विकास के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी।
परिसर में स्थापित पं. दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के विकास के लिए वह डेढ़ करोड की धनराशि देने की घोषणा करते हैं। यह धनराशि हर साल 50 लाख के तौर पर उपलब्ध कराए जाएगी। इस विश्वविद्यालय के लिए सभी पदों की स्वीकृति की गई है जो बीते 25 सालों में किसी ने किसी विश्वविद्यालय के लिए नहीं किया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की मांग अन्य जनपदों के कॉलेजों को संबद्घ करने की मांग पर कहा कि इसके लिए कमेटी बना दी गई है और जल्द ही इसका समाधान कर दिया जाएगा ताकि विश्वविद्यालय की आमदनी कम न हो। सभी विश्वविद्यालय को शोध गंगा पोर्टल बनाने का निर्देश दिया गया है विश्वविद्यालय के शोध पर इसे डालें।
यह भी कहा कि इसे एक-दूसरे विश्वविद्यालय की शोध को देख कर नया कर सकेंगे। कहा कि शिक्षा का स्तर सुधारने व नकल विहीन परीक्षा कराने का काम किया और इसके लिए संसाधनों का प्रयोग किया और इससे छात्र व शिक्षक का उत्पीड़न नहीं हुआ।