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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Ram Mandir: Pran Pratishtha..story from Kashi, descendants of Lord Ram are present in the form of Shiva in Var

Ram Mandir: प्राण प्रतिष्ठा..कहानी काशी से, वाराणसी में शिवस्वरूप में विराजमान हैं भगवान राम के वंशज

Thu, 04 Jan 2024 01:33 PM IST
किरन रौतेला आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Thu, 04 Jan 2024 01:33 PM IST
सार

मोक्षदायिनी काशी में भगवान राम के वंशज भी गंगा के तट पर शिवस्वरूप में विराजमान हैं। सतयुग से लेकर त्रेता और द्वापर युग तक काशी में उन्होंने तपस्या की और शिवलिंग स्थापित किए। आज वह तीर्थ के रूप में काशी में हैं।

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Ram Mandir: Pran Pratishtha..story from Kashi, descendants of Lord Ram are present in the form of Shiva in Var
राम मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिव स्वरूपा काशी में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। भगवान शिव की नगरी की महिमा ही है कि महादेव के आराध्य राम के वंशज भी शिवस्वरूप में काशीवास कर रहे हैं। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का समारोह जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, काशी में राम से जुड़े स्थान भी सामने आ रहे हैं। बीएचयू के प्रोफेसर और केंद्रीय ब्राह्मण महासभा की 77 दिनों की खोज में भगवान राम के वंशजों के तीर्थ मिले हैं। भगवान राम के वंशजों की काशी में खोज के लिए काशी खंड समेत 125 से अधिक पुस्तकों का अध्ययन किया गया।

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मोक्षदायिनी काशी में भगवान राम के वंशज भी गंगा के तट पर शिवस्वरूप में विराजमान हैं। सतयुग से लेकर त्रेता और द्वापर युग तक काशी में उन्होंने तपस्या की और शिवलिंग स्थापित किए। आज वह तीर्थ के रूप में काशी में हैं। महाराजा हरिश्चंद्र से लेकर भगवान राम द्वारा स्थापित शिवलिंग उनके नाम से ही स्थापित हैं। रामघाट पर सत्यवादी राज हरिश्चंद्र तीर्थ व विग्रह हैं और यहां पर स्नान व पूजन करने वाला कभी भी सत्य के मार्ग से नहीं हटता है।

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काशीखंड के अध्याय 84 में भी भगवान राम के वंशजों के तीर्थ के बारे में वर्णन मिलता है। हरिश्चंद्र तीर्थ पर सत्कर्म करने वाले का लोक और परलोक दोनों सुधर जाता है। संकटा माता मंदिर के सामने राजा दिलीप भी शिवलिंग के स्वरूप में विराजमान हैं। मान्यता है कि इनके दर्शन मात्र से ही मनुष्य के पापों का नाश हो जाता है। चंद्रेश्वर के मंदिर चंद्रेश्वर के निकट राजा सगर का सगरतीर्थ है। यहां पर स्नान करने से मनुष्य कभी दुख के सागर में नहीं डूबता। चंद्रेश्वर के निकट मणिकर्णिका ब्रह्मनाल के बीच दक्षिण में राजा भगीरथ का भागीरथी तीर्थ है। जो मनुष्य वहां पर स्नान करता है, वह ब्रह्म हत्या से भी छूट जाता है। मणिकर्णिका पर स्वर्गद्वार के पास ही भागीरथीश्वर लिंग के दर्शन करने से ब्रह्महत्या का पाप भी कट जाता है। रावण को मारने के बाद भगवान राम ने काशी में मीरघाट धर्मकूप में रघुनाथेश्वर लिंग काशी में स्थापित किया। इसके स्पर्श मात्र से ब्रह्मघाती मनुष्य भी शुद्ध हो जाता है।

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77 दिनों की खोज के बाद मिले तीर्थ व विग्रह

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में धर्म शास्त्र मीमांसा विभाग के प्रो. माधव जनार्दन रटाटे, काशी करवत मंदिर के महेश उपाध्याय, मंगला गौरी के महंत नरेंद्र पांडेय, भृगु संहिता विद्वान वेदमूर्ति शास्त्री, मनीष पांडेय, सुधांशु पांडेय व केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा की टीम ने 77 दिनों की खोज के बाद भगवान राम के वंशजों के तीर्थ व शिवलिंग को चिह्नित किया है।


राजा मांधाता की तपस्या से काशी में आए केदारेश्वर

राजा मांधाता ने दशाश्वमेध क्षेत्र के मानमंदिर में चक्रवर्ती का पद प्राप्त किया था। उन्होंने काशी में मांधातृ तीर्थ स्थापित किया। उनकी तपस्या से ही प्रसन्न होकर भगवान केदारेश्वर काशी में प्रकट हुए। राजा मांधाता के पुत्र राजा मुचुकुंदेश्वर द्वारा स्थापित शिवलिंग मुचुकेंद्रश्वर लिंग बड़ादेव पर हैं। बड़ादेव मंदिर के आगे अगस्तेश्वर के दक्षिण में विभीषण द्वारा स्थापित लिंग है। सोनारपुरा पांडेय हवेली गली में केदारेश्वर से दक्षिणापथ में चन्द्रवंशीय और सूर्यवंशीय राजाओं द्वारा स्थापित सहस्रों लिंग विद्यमान हैं।



ब्रह्माजी की 67वीं पीढ़ी में हुआ राम का जन्म

वाल्मीकि रामायण के अनुसार ब्रह्माजी से मरीचि हुए और मरीचि के पुत्र कश्यप हुए। इसके बाद कश्यप के पुत्र विवस्वान हुए और विवस्वान से सूर्यवंश का आरंभ माना जाता है। विवस्वान से पुत्र वैवस्वत मनु हुए। भगवान राम का जन्म वैवस्वत मनु के दूसरे पुत्र इक्ष्वाकु के कुल में हुआ था। इक्ष्वाकु से सूर्यवंश में वृद्धि होती चली गई। राजा सगर के प्रपौत्र दिलीप और दिलीप से प्रतापी भगीरथ का जन्म हुआ। भगीरथ के पुत्र ककुत्स्थ हुए और ककुत्स्थ के पुत्र रघु का जन्म हुआ। रघु से रघुवंश की शुरुआत हुई। भगवान राम का जन्म ब्रह्माजी की 67 पीढ़ियों में हुआ।

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