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अयोध्या पहुंचने से पहले ही हो गया गिरफ्तार

Sat, 01 Aug 2020 01:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2020 01:06 AM IST
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ram mandir
वाराणसी। वह दौर आज भी याद आता है तो सब कुछ आंखों के सामने चललित्र की तरह घूम जाता है। अफसोस बस यही है कि हम लोग उस दौर में अयोध्या नहीं पहुंच पाए थे क्योंकि रेलवे स्टेशन पर ही हम लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। यह कहना है नारदघाट निवासी तुलसी सुब्रमण्यम जोशी का। अयोध्या की घटना को याद करते हुए 68 वर्षीय तुलसी सुब्रमण्यम जोशी की आंखों में आज भी वही भाव नजर आता है। उन्होंने बताया कि उस समय मैं भाजपा का महामंत्री था और मेेरी अवस्था 40 साल थी। हम लोग बकायदा योजना बनाकर अपने मित्रों की टोली के साथ फैजाबाद जाने वाली ट्रेन में सवार हुए। योजना केतहत सभी दोस्त अलग-अलग बोगियों में बैठे थे। हम लोगों की संख्या 40-45 के आसपास थी। मैं सबसे आगे वाली बोगी में था। ट्रेन जैसे ही फैजाबाद पहुंची हम लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बाकी कुछ हमारे साथी उपेंद्र सहस्त्र बुद्धे, गंगाधर राव और राजू पाठक दूसरी बोगियों में थे वह पीछे से ही उतरकर अयोध्या की ओर रवाना हो गए। पुलिस ने हम लोगों को बाल सुधार गृह में रखा था। मामला शांत होने के बाद हम लोगों को छोड़ा गया। हंगाम शुरू होने के बाद हम लोग भी अंडरग्राउंड हो गए थे और काफी दिनों तक अंदर-अंदर ही जागरूकता अभियान चलाते रहे। उस दौरान हमारे आवास पर भी काफी कारसेवकों का आना-जाना लगा रहता था। सात भाईयों का सामूहिक परिवार है और आज भी पूरा परिवार एक ही घर में रहता है। मूलत: तेलंगाना केरहने वाले हैं लेकिन कई पीढिय़ों से काशी में रह रहे हैं।
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हम लोग तो मुगलसराय स्टेशन पर ही हो गए गिरफ्तार
वाराणसी। भाजपा के पूर्व विधायक श्यामदेव राय चौधरी ने बताया कि राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए काशी से भी कारसेवकों का जत्था निकला था। आडवाणी जी की रथयात्रा निकली थी और उनको बिहार जाना था। हम और रविंद्र जायसवाल उनका स्वागत करने केलिए मुगलसराय केलिए निकले। उस समय बहुत निगरानी हो रही थी। हम लोगों को आभास तो था कि पुलिस निगाह रखे हुए है। पूर्व विधायक ने बताया कि हम लोग बच-बचाकर निकले लेकिन पड़ाव पर पुलिस ने पहचान लिया और रोकने का प्रयास किया लेकिन हम निकल गए। भागे-भागे मुगलसराय पहुंचे। हमारे पहुंचने से पहले ही हम लोगों की खबर हो गई। हम लोग ज्यों स्टेशन पर पहुंचे। हम लोगों से एक गलती यह हो गई कि एक ट्रेन कलकता से आ रही थी और एक जा रही थी। हम लोग आने वाली ट्रेन में चढ़कर आडवाणी जी को खोजने लगे। इसी दौरान पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हम लोगों को मिर्जापुर जेल भेज दिया गया। मिलने-जुलने वालों का तांता लगा रहता था। उनका उत्साह देखने लायक था। खबरें आती रहती थीं और उसके बाद जय श्रीराम और हर-हर महादेव का नारा लगता था।
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