नहीं रहे राम गोविंद चौधरी: अखिलेश यादव के करीबी नेताओं में पहचान, आठ बार रहे विधायक; मुलायम के खास भी
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का जन्म बलिया के गोसाईंपुर गांव में हुआ था। छात्र राजनीति से सफर शुरू करने वाले चौधरी आठ बार विधायक चुने गए। वह सपा सरकार में मंत्री रहे और 2017 में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक और लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की।
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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले चौधरी आठ बार विधानसभा के लिए चुने गए। वह समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री भी रहे और 2017 में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
राम गोविंद चौधरी का जन्म 9 जुलाई 1953 को बलिया जिले के गोसाईंपुर गांव में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने उच्चतर माध्यमिक शिक्षा पूरी की। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर से स्नातक की पढ़ाई की और बाद में लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल कर वकालत शुरू की। हालांकि, राजनीति से उनका जुड़ाव छात्र जीवन में ही हो गया था। वर्ष 1971-72 में वह बलिया के मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय में महामंत्री चुने गए और बाद में कॉलेज के अध्यक्ष भी बने।
1977 में पहली बार बने विधायक
राम गोविंद चौधरी ने वर्ष 1977 के विधानसभा चुनाव में चिलकहर विधानसभा सीट से जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। उन्होंने कांग्रेस के जितेंद्र बहादुर को हराया। इसके बाद 1980 में भी उन्होंने जितेंद्र बहादुर को पराजित किया।
1985 में वह लगातार तीसरी बार विधायक बने। 1989 के विधानसभा चुनाव में जनता दल के टिकट पर उन्होंने बसपा के छोटेलाल को हराकर चौथी बार जीत दर्ज की। 1991 में जनता पार्टी के टिकट पर उन्होंने एक बार फिर छोटेलाल को हराया और पांचवीं बार विधानसभा पहुंचे।
मुलायम सिंह यादव सरकार में मंत्री रहे
दिसंबर 1990 से 1991 के बीच राम गोविंद चौधरी ने मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, 1993 के विधानसभा चुनाव में उन्हें चिलकहर सीट से हार का सामना करना पड़ा। 1996 में उन्होंने चंद्रशेखर की समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन वह चौथे स्थान पर रहे।
2002 में वापसी, सपा विधानमंडल दल के नेता बने
वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में राम गोविंद चौधरी ने समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) के टिकट पर चिलकहर से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। उन्होंने अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस के बच्चा पाठक को हराया। इस जीत के बाद वह समाजवादी पार्टी से विधानमंडल दल के नेता चुने गए। 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बांसडीह विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन बसपा के प्रत्याशी शिव शंकर से महज 488 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए।
2012 में फिर जीत, अखिलेश सरकार में बने मंत्री
2012 के विधानसभा चुनाव में राम गोविंद चौधरी ने बांसडीह सीट से वापसी की। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी केतकी सिंह को हराया। प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद अखिलेश यादव के मंत्रिमंडल में उन्हें बेसिक शिक्षा और समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई।
इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बांसडीह से फिर जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्हें 51,201 वोट मिले, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी केतकी सिंह को 49,574 वोट मिले। चुनाव के बाद राम गोविंद चौधरी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। समाजवादी पार्टी में आंतरिक मतभेद के दौर में राम गोविंद चौधरी खुलकर अखिलेश यादव के साथ खड़े दिखाई दिए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अखिलेश यादव के प्रति अपनी राजनीतिक निष्ठा जाहिर की थी।
बयानों को लेकर भी रहे चर्चा में
राम गोविंद चौधरी कई बार अपने बयानों को लेकर भी सुर्खियों में रहे। सपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए मुख्तार अंसारी को लेकर उन्होंने टिप्पणी की थी कि ऐसे लोगों का पार्टी से जाना अच्छा है। जंगीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान नदियों की धार्मिक मान्यता को लेकर दिया गया उनका बयान भी विवादों में रहा था। इन बयानों के चलते वह राजनीतिक चर्चाओं में बने रहे।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ राम गोविंद चौधरी का सफर कई दशकों तक उत्तर प्रदेश की विधानसभा और सरकार की राजनीति से जुड़ा रहा। विधायक, मंत्री और नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।