पीएम मोदी के गोद लिए गांव की तस्वीर, जूते वालों को कालीन, नंगे पांवों को जमीन
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यह तस्वीर वाराणसी में प्रधानमंत्री के गोद लिए गांव जयापुर की है। तस्वीर में राजातालाब तहसील की एसडीएम और तहसीलदार गरीबों को कंबल बांट रहीं हैं। विडंबना ही है कि हम गणतंत्र दिवस की 71वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं और अभी तक इस गणतंत्र के गण बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। हमें अभी भी कंबल बांटने पड़ रहे हैं।
बात इतनी भर नहीं है। दरअसल इस गणतंत्र में आज तक गण को उचित स्थान और सम्मान नहीं मिल सका है। इसी तस्वीर की बात करें। तस्वीर में गरीबों को कंबल बांट रहीं दोनों प्रशासनिक अधिकारियों के पैरों में महंगे जूते हैं और कंबल ले रहे गरीबों के पैर में इस हाड़ कंपाने वाली ठंड में पहनने को एक साधारण चप्पल तक नहीं है। महंगे जूते पहने दोनों अधिकारियों के लिए कालीन भी बिछाई गई है और कंबल लेने वालों के नंगे पांव जमीन पर।
आखिर यह कौन सा तंत्र है, जो महंगे जूतों के लिए कालीन बिछा रहा है, लेकिन ठंड से ठिठुरते नंगे पैरों को चप्पल तक नहीं दे पा रहा। यह पहला वाकया नहीं है। आए दिन हम अखबारों में ऐसी संवेदनहीन खबरों से रूबरू होते ही रहते हैं। सच तो यह है कि हमारा तंत्र इस कदर संवेदनहीन हो चुका है कि ऐसी घटनाओं से अब किसी को कोई खास फर्क नहीं पड़ता।
हर बार गरीबी पर ऐसी ही निर्मम हंसी हंसी जाती है। हंसने और ठहाके लगाने से जी भर जाए तो कभी कंबल तो कभी साड़ी और कभी पांच किलो आटा, चावल का झुनझुना थमा दिया जाता है। ...आइये हम मनाएं गणतंत्र दिवस।