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झील बनी काशी, बेहाल हुए शहरवासी

Sun, 29 Sep 2019 02:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 29 Sep 2019 02:21 AM IST
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rain
वाराणसी। तीन दिनों से हो रही बरसात ने आम जनता की दुश्वारियों को भी बढ़ा दिया है। शहर से लेकर गांव तक जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया है। शहरी इलाकों में तो कई जगह घरों के रसोई तक बरसात का पानी पहुंच चुका है। वहीं बाजारों की दुकानों में भी बरसात का पानी घुसने से दुकानदारों के होश उड़े हुए हैं। गोदौलिया, नई सड़क, गिरिजाघर, पान दरीबा, रविंद्रपुरी चौराहा, सामनेघाट, ट्रामा सेंटर समेत पूरा इलाका पहले से ही डूबा हुआ है। शहर की पॉश कालोनियां भी जलभराव से अछूती नहीं रहीं।
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शनिवार को बरसात के कारण शहरी इलाके में जलभराव की स्थिति से आम जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित रहा। गिरजाघर से नई सड़क तक बरसात का पानी कमर तक भरने के कारण दुकानें खुली ही नहीं। नई सड़क औरंगाबाद से लेकर सोनिया तक जलभराव की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। दशाश्वमेध से लक्सा तक घुटने भर पानी भरने के कारण कई लोगों की गाड़ियां बंद हो गईं। बाहर से आए पिंडदानी और पर्यटक तो हैरान-परेशान घूमते रहे। पर्यटकों ने तो होटल और लाज से निकलना मुनासिब नहीं समझा। शहर के सबसे पॉश माने जाने वाले इलाके रवींद्रपुरी में भी जलभराव के कारण वाहनों की रफ्तार थमी रही। अधिकांश सरकारी विभागों के परिसर तक पानी से भर गए हैं। मंडुवाडीह के शिवदासपुर में लोगों के घरों के अंदर बरसात का पानी घुस गया है। पंचवटी नगर की लक्ष्मी और मीरा के रसोई घर में जब बरसात का पानी घुसा तो वह रोने लगीं।
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जलभराव से मरीजों को हो रही सांसत
बरसात से सर्वाधिक दिक्कतें पशु-पक्षियों के अलावा अस्पताल में मरीजों को हो रही है। कैंट रेलवे स्टेशन परिसर और बीएचयू के सर सुंदर अस्पताल परिसर में पानी भर गया है। डीआरएम कार्यालय, एईएन कालोनी, डीरेका कालोनी समेत रेलवे की कालोनियों में कमर भर तक पानी लगा हुआ है। निचले इलाकों में जमा पानी को निकालने की जुगत में लोग जुटे हैं लेकिन नगर निगम की ओर से कोई सहयोग नहीं मिलने के कारण वह बरसात खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।
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केंद्रीय मंत्री के घर में घुसा पानी
केंद्रीय कौशल विकास मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के सरस्वतीनगर कालोनी स्थित घर में पानी घुस गया। पूरी कालोनी जलजमाव की समस्या से जूझ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बरसात में उन्हें इस समस्या से दो चार होना पड़ता है।
ड्रेनेज के नाम पर डूब गए 450 करोड़ रुपये
वाराणसी। शहर को जलजमाव से मुक्ति के लिए कागजों पर प्लान बनाया गया। पिछले दस सालों के भीतर करीब 450 करोड़ के प्रस्ताव तैयार किए गए। ड्रेनेज सिस्टम तो तैयार हुआ लेकिन खामियों के कारण उसको शुरू नहीं किया जा सका। बरसात की परेशानी से झेल रहे लोगों का कहना है कि मामूली बरसात में बनारस की गलियां, सड़कें, कालोनियों व मोहल्लों में जलजमाव हो जाता है।

चार मकान गिरे और पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित
वाराणसी। शहर में बरसात के दौरान चार मकान गिरने से हड़कंप मच गया। चौक के सूत टोला में जलजमाव से दीवार गिर गई। दालमंडी के रामजी कटरे की पिछले हिस्से की दीवार ढह गई। जालपा देवी मंदिर के मकान गिरने से पांच बाइक व स्कू टी दब गई। बताया जाता है कि वहां एक और भी मकान गिरा है। विशेश्वरगंज के दूध कटरा स्थित संगत चेतन मठ से सटा पुराना मकान गिर गया। शहर के कई इलाके में पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित रहा। मंडुवाडीह में नीम का पेड़ और चांदपुर में एक पेड़ गिरने के कारण यातायात प्रभावित रहा। वहीं दूसरी तरफ मानस मंदिर के पास पीपल का पेड़ गिरने के कारण दो लोग घायल हो गए। सुंदरपुर इलाके में पाकड़ का पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित रहा।
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