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34.5 करोड़ से बदलेगी वसुंधरा रेलवे कालोनी की सूरत

Thu, 19 Nov 2020 01:56 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 19 Nov 2020 01:56 AM IST
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वाराणसी। स्मार्ट सिटी के तहत लहरतारा स्थित रेलवे की वसुंधरा कालोनी की सूरत जल्द ही बदलने वाली है। कालोनी की पुर्नविकास के लिए रेल भूमि विकास प्राधिकरण आरएलडीए ने ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। परियोजना के तहत 2.5 हेक्टेयर भूमि में कामर्शियल और कालोनी दोनों का विस्तार होगा। 1 हेक्टेयर भूमि पर कालोनी का विकास होगा तो वहीं 1.5 हेक्टेयर भूमि में कामर्शियल डेवलपमेंट किया जाएगा। कामर्शियल डेवलपमेंट के लिए 45 वर्ष की लीज अवधि को आरक्षित मूल्य 24 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। रेलवे कालोनी के पुनर्विकास कार्यों के लिए 34.5 करोड़ रुपये खर्च होंगे। डेवलपर कालोनी की 5 साल की अवधि तक देखभाल करेंगे।
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परियोजना के तहत लहरतारा कैंसर अस्पताल के पास वसुंधरा कालोनी में पुनर्विकास के तहत एक मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण प्रस्तावित है। जिसमें पार्किंग, लॉबी, लिफ्ट, सीढ़ियां व अन्य कई आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगी।
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आरएलडीए के वाइस चेयरमैन वेद प्रकाश डुडेजा के अनुसार रेलवे कॉलोनी का पुनर्विकास इस क्षेत्र में अपनी तरह का पहला विकास कार्य होगा। इस विकास से आसपास के क्षेत्र में रियल एस्टेट परियोजनाओं और बाजार को बढ़ावा मिलेगा। आरएलडीए वर्तमान में 62 स्टेशनों पर काम कर रहा है, जबकि इसकी सहायक आईआरएसडीसी ने अन्य 61 स्टेशनों को पुनर्विकसित करने के लिए चयनित किया है। पहले चरण में, आरएलडीए ने पुनर्विकास के लिए नई दिल्ली, तिरुपति, देहरादून, नेल्लोर और पुंडुचेरी जैसे प्रमुख स्टेशनों को प्राथमिकता दी है।
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इस परियोजना के मुख्य घटक में रेलवे की अनिवार्य परिसंपत्तियों का विकास और वाणिज्यिक विकास शामिल है, जहां लीज की अवधि 45 वर्ष है। व्यावसायिक विकास के लिए बीयूए लगभग 3.2 लाख वर्गमीटर है, वहीं समग्र एफएआर के लिए 1.94 अर्थात वाणिज्यिक के लिए 1.75 और हॉस्पिटैलिटी के लिए 2.5 है।
गंगा नदी के तट पर स्थित, वाराणसी को हिंदू धर्म के पवित्र स्थलों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसने जैन धर्म और बौद्ध धर्म के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शहर में हर साल भक्तों की भारी भीड़ आती है, लोग पावन गंगा नदी के पवित्र जल में स्नान करने आते हैं। शहर बनारसी सिल्क के लिए भी प्रसिद्ध है।

रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) रेल मंत्रालय के अधीन एक सांविधिक प्राधिकरण है। इसकी स्थापना गैर-भाड़ा उपायों द्वारा राजस्व अर्जन के उद्देश्य से रेल भूमि का वाणिज्यिक विकास करने के लिए रेल अधिनियम 1989 मे संशोधन करके हुई थी। वर्तमान में, भारतीय रेलवे के पास पूरे देश में लगभग 43,000 हेक्टेयर खाली भूमि है। आरएलडीए के पास लीजिंग के लिए देश भर में 79 कमर्शियल (ग्रीन फील्ड) साइट हैं और प्रत्येक के लिए योग्य डेवलपर्स का चयन एक खुली और पारदर्शी प्रक्त्रिस्या के माध्यम से किया जाएगा। आरएलडीए वर्तमान में 84 रेलवे कॉलोनी के पुनर्विकास परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है और हाल ही में पुनर्विकास के लिए गुवाहाटी में एक रेलवे कॉलोनी को लीज पर दिया है।
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