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बीएचयूः पूर्व कुलपति जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल की 215 नियुक्तियों पर सवाल, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 17 Dec 2017 01:56 PM IST
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बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल के दौरान 215 शैक्षणिक पदों पर हुई नियुक्तियों पर सवाल खड़ा हो गया है। इसको लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति इरशाद अली की खंडपीठ ने इस मामले में दायर याचिका की सुनवाई में पूर्व में 12 अक्तूबर, 2017 को नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में जारी उस आदेश के साथ जोड़ा है, जिसमें नियुक्तियों के लिए रोस्टर नियमों को गलत तरीके से लागू करने को चुनौती दी गई थी।
प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों को लेकर हाईकोर्ट में डॉ. अंगद कुमार सिंह व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि पूरे मामले में अदालत का जो अंतिम फैसला होगा, वही मान्य होगा।
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अगली सुनवाई जनवरी 2018 के तीसरे हफ्ते में होगी। प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में जारी विज्ञापन में 500 पदों के लिए आवेदन आए थे। इनमें 215 पदों पर नियुक्तियां हुई थी।
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हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति इरशाद अली की खंडपीठ ने इस मामले में दायर याचिका की सुनवाई में पूर्व में 12 अक्तूबर, 2017 को नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में जारी उस आदेश के साथ जोड़ा है, जिसमें नियुक्तियों के लिए रोस्टर नियमों को गलत तरीके से लागू करने को चुनौती दी गई थी।
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प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों को लेकर हाईकोर्ट में डॉ. अंगद कुमार सिंह व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि पूरे मामले में अदालत का जो अंतिम फैसला होगा, वही मान्य होगा।
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अगली सुनवाई जनवरी 2018 के तीसरे हफ्ते में होगी। प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में जारी विज्ञापन में 500 पदों के लिए आवेदन आए थे। इनमें 215 पदों पर नियुक्तियां हुई थी।
नियुक्तियों को निरस्त करने के लिए किया था आवेदन
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याचिकाकर्ता ने बीएचयू द्वारा प्रकाशित विज्ञापन संख्या 1/2017-18 के तहत आरक्षण रोस्टर नियमों को गलत तरीके से लागू कर की गई नियुक्तियों को निरस्त करने के लिए आवेदन किया था।
बताया था कि विज्ञापन में 500 शैक्षणिक पदों के लिए आवेदन मंगाया गया था जिसमें से 215 पदों पर नियुक्तियां कर भी दी गईं। विज्ञापन में रोस्टर नियमों को ठीक से लागू न करने के कारण आरक्षित वर्ग के पदों में भारी कमी आ गई।
इस गड़बड़ी की शिकायत संसद तक हुई थी, जिसके बाद कुलपति प्रो. त्रिपाठी को संसद की पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति के सामने पेश होना पड़ा था। डॉ. अंगद कुमार सिंह ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में नियुक्ति में नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ यह भी कहा था कि कोर्ट ने रोस्टर बनाने की प्रक्रिया में यूजीसी से भी सलाह लेने की बात कही गई थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
बताया था कि विज्ञापन में 500 शैक्षणिक पदों के लिए आवेदन मंगाया गया था जिसमें से 215 पदों पर नियुक्तियां कर भी दी गईं। विज्ञापन में रोस्टर नियमों को ठीक से लागू न करने के कारण आरक्षित वर्ग के पदों में भारी कमी आ गई।
इस गड़बड़ी की शिकायत संसद तक हुई थी, जिसके बाद कुलपति प्रो. त्रिपाठी को संसद की पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति के सामने पेश होना पड़ा था। डॉ. अंगद कुमार सिंह ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में नियुक्ति में नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ यह भी कहा था कि कोर्ट ने रोस्टर बनाने की प्रक्रिया में यूजीसी से भी सलाह लेने की बात कही गई थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया।