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नए सत्र से बदलेगा हिंदी-संस्कृत की किताबों का क्यूआर कोड
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कक्षा छह से आठवीं तक की हिंदी और संस्कृत की किताबों में लगे क्यूआर कोड में बदलाव किया जाएगा। नए शैक्षिक सत्र से क्यूआर कोड मैटेरियल को और अपडेट किया जाएगा। यह जिम्मेदारी एससीईआरटी ने राज्य हिंदी संस्थान को सौंपी है। इससे पहले राज्य हिंदी संस्थान ने दो वर्ष पहले कक्षा छह से आठ तक की हिंदी और संस्कृत की नई किताब तैयार की थी। अब इन किताबों में आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाएगा।
प्रत्येक पाठ के साथ क्यूआर कोड लगाने से किताब को रोचक बनाने में मदद मिलेगी। क्यूआर कोड में पाठ से संबंधित वीडियो और अन्य संदर्भ सामग्री का लिंक दिया जाएगा। हालांकि, बदलाव लाने से पहले शिक्षकों से फीडबैक लिया जाएगा। पूछा जाएगा कि क्यूआर कोड का छात्रों को कितना फायदा मिलेगा। साथ ही शिक्षण में इसका प्रयोग किस तरह बच्चों के लिए फायदेमंद होगा। इसके लिए शिक्षकों की कार्यशाला होगी। वहीं, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को कई बार किताबों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में जिस अभिभावकों के पास स्मार्टफोन की सुविधा है, वो किताबों पर बार कोड स्कैन कर इसे पढ़ सकते हैं।
नए शैक्षिक सत्र से हिंदी व संस्कृत की किताबों का क्यूआर कोड बदल जाएगा। नई व्यवस्था के तहत हर पाठ के बाद क्यूआर कोड रहेगा, जिसे स्कैन कर पाठ से जुड़ी सामग्री अभिभावक व शिक्षकों के फोन में उपलब्ध हो जाएगी। -राकेश सिंह, बीएसए
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प्रत्येक पाठ के साथ क्यूआर कोड लगाने से किताब को रोचक बनाने में मदद मिलेगी। क्यूआर कोड में पाठ से संबंधित वीडियो और अन्य संदर्भ सामग्री का लिंक दिया जाएगा। हालांकि, बदलाव लाने से पहले शिक्षकों से फीडबैक लिया जाएगा। पूछा जाएगा कि क्यूआर कोड का छात्रों को कितना फायदा मिलेगा। साथ ही शिक्षण में इसका प्रयोग किस तरह बच्चों के लिए फायदेमंद होगा। इसके लिए शिक्षकों की कार्यशाला होगी। वहीं, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को कई बार किताबों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में जिस अभिभावकों के पास स्मार्टफोन की सुविधा है, वो किताबों पर बार कोड स्कैन कर इसे पढ़ सकते हैं।
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नए शैक्षिक सत्र से हिंदी व संस्कृत की किताबों का क्यूआर कोड बदल जाएगा। नई व्यवस्था के तहत हर पाठ के बाद क्यूआर कोड रहेगा, जिसे स्कैन कर पाठ से जुड़ी सामग्री अभिभावक व शिक्षकों के फोन में उपलब्ध हो जाएगी। -राकेश सिंह, बीएसए
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