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काशी में पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ: मंदिरों की आय को लेकर कही बड़ी बात, हिंदू बोर्ड का भी जिक्र; व्यक्त किए विचार

Mon, 14 Sep 2026 05:54 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 14 Sep 2026 05:54 AM IST
सार

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि मंदिरों की आय का उपयोग केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित न रहकर समाज के गरीब, वंचित और जरूरतमंद लोगों की सेवा में होना चाहिए। सिगरा में आयोजित संवाद में उन्होंने धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता और संसाधनों के पारदर्शी प्रबंधन पर जोर दिया। इसके लिए ‘हिंदू बोर्ड’ जैसी स्वतंत्र एवं जवाबदेह व्यवस्था की आवश्यकता बताई।

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Pushpendra Kulshrestha in Kashi Made significant statement regarding temple income and mentioned Hindu Board
कार्यक्रम को संबोधित करते पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ। - फोटो : संवाद

विस्तार

प्रखर वक्ता एवं चिंतक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि देश के मंदिरों से प्राप्त धन पर सरकार का नियंत्रण अथवा उसका सरकारी उपयोग किए जाने के बजाय हिंदू समाज को अपने धार्मिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए स्वतंत्र और पारदर्शी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने ‘हिंदू बोर्ड’ जैसी व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। वह सिगरा स्थित एक होटल में मंदिरों की आय, धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता और समाज के जरूरतमंद वर्गों के कल्याण से जुड़े विषयों पर आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम में विचार व्यक्त कर रहे थे।

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कुलश्रेष्ठ ने कहा कि मंदिरों से प्राप्त धन का उपयोग केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका उपयोग गरीब, वंचित और जरूरतमंद लोगों की सेवा एवं कल्याण के लिए भी किया जा सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीब परिवारों की सहायता और अन्य सामाजिक सरोकारों के माध्यम से धार्मिक संस्थानों से प्राप्त संसाधनों को समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में लगाया जा सकता है।

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उन्होंने कहा कि मंदिरों और धार्मिक संस्थानों के संसाधनों के प्रबंधन के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित किए जाने की जरूरत है, जो पारदर्शी होने के साथ जवाबदेह भी हो। समाज के प्रति उत्तरदायित्व सुनिश्चित करते हुए संसाधनों का सदुपयोग किया जाना चाहिए, ताकि उसका लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।

संवाद के दौरान मंदिरों की आय और धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। कुलश्रेष्ठ ने कहा कि धार्मिक संसाधनों के प्रबंधन में समाज की भागीदारी और पारदर्शिता महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, एक व्यवस्थित तंत्र के माध्यम से धार्मिक संस्थानों के संसाधनों का उपयोग सामाजिक कल्याण के कार्यों में अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता रोटेरियन सीके त्रिवेदी ने की, जबकि संयोजन रोटेरियन अमित गुप्ता ने किया। इस मौके पर सतीशचंद जैन, डॉ. आरके जायसवाल, डॉ. राकेश मोहन, नर्वदानंद दूबे, शैलेन्द्र श्रीवास्तव, वर्षा श्रीवास्तव, नितिन, दीपक माहेश्वरी, सुरेश खंडेलवाल और इंद्रसेन सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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