UP News: शंकराचार्य के मार्गदर्शन में तैयार होगी पुरोहित कल्याण बोर्ड की नियमावली, काशी विद्वत परिषद की बैठक में तय होगा स्वरूप
उत्तर प्रदेश में बनने वाले पुरोहित कल्याण बोर्ड देश भर के लिए नजीर बनेगा। बोर्ड की नियमावली और प्रारूप श्री काशी विद्वत परिषद तैयार करेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिषद को जिम्मेदारी सौंपी है।
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पंडा, पुजारी, तीर्थ पुरोहित, संन्यासी समाज के लिए बनने वाला पुरोहित कल्याण बोर्ड देश भर के राज्यों के लिए नजीर बनेगा। शंकराचार्य के मार्गदर्शन और सुझावों के आधार पर नियमावली तैयार की जाएगी। इसके साथ ही इसमें पुरोहित, पंडा, संन्यासी, तीर्थ पुरोहित और ब्राह्मण समाज के लोगों से भी सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे।
बोर्ड की नियमावली के लिए काशी विद्वत परिषद की पहली बैठक सात जुलाई के बाद आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मठ-मंदिरों के पुजारी, सेवईत, पुरोहित और तीर्थ पुरोहितों के संरक्षण के लिए पुरोहित कल्याण बोर्ड के गठन का एलान किया है और इसकी नियमावली बनाने की जिम्मेदारी काशी विद्वत परिषद की 11 सदस्यीय टीम को सौंपी है।
सात जुलाई के बाद पहली बैठक
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि नियमावली की तैयारी के लिए सात जुलाई के बाद पहली बैठक होगी। इसमें विद्वत परिषद की वेबसाइट पर देश व प्रदेश के पुरोहित, पंडा, संन्यासी और ब्राह्मण समाज से सुझाव मांगे जाएंगे।
देशभर के तीर्थ पुरोहितों के विचार भी इसमें शामिल किए जाएंगे। साथ ही पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के मार्गदर्शन में केरल और तमिलनाडु में बनाए गए पुरोहित कल्याण बोर्ड की नियमावली का भी अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही सभी शंकराचार्य से भी इस मामले में मार्गदर्शन लिया जाएगा। अहम बात यह है कि इस नियमावली को तैयार करने के दौरान हिंदू धर्म के सभी पंथों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।
महीने भर में तैयार होगा नियमावली का स्वरूप
परिषद की बैठक के बाद मथुरा, अयोध्या, प्रयागराज, हरिद्वार, वाराणसी के अलावा दूसरे जिलों और राज्यों के संत व पुरोहितों के सुझाव भी मांगे जाएंगे। सभी सुझाव प्राप्त होने के बाद विद्वानों की टीम इस पर विमर्श करेगी। महीने भर के अंदर बोर्ड की नियमावली को स्वरूप दिया जाएगा। इसके बाद इसे मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा।
पुजारियों को मिलेगा प्रशिक्षण
परिषद के महामंत्री ने बताया कि बोर्ड की नियमावली में पुजारी, तीर्थ पुरोहित, सेवईत, पुरोहितों के हितों के संरक्षण के साथ ही मठ-मंदिरों की जमीनों को संरक्षित करने के भी इंतजाम होंगे। इसके साथ ही युवा पुजारी व संस्कृत के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण का भी इंतजाम किया जाएगा। मठ-मंदिरों में होने वाले उत्तराधिकार के विवादों को सुलझाने के लिए भी कुछ बिंदुओं को नियमावली में जोड़ा जाएगा।