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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलनानंद सरस्वती बोले, ऐसे बाबा कर रहे गलत काम
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 03 Nov 2017 10:45 AM IST
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलनानंद सरस्वती
- फोटो : अमर उजाला
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पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती गुरुवार को वाराणसी पहुंचे। वो यहां छह दिनों तक प्रवास करेंगे। अमर उजाला से उन्होंने विशेष बातचीत की। उन्होंने कहा धर्म की आड़ में वही लोग गलत काम कर रहे हैं, जो व्यापार और प्रचार तंत्र के माध्यम से बाबा बने हैं।
राजनीतिक पार्टियां इनका इस्तेमाल करती हैं और जब तालमेल बिगड़ता है तो उनकी सच्चाई सामने आ जाती है। जो संत परंपरा के वाहक हैं, वे बिना विचलित हुए अपने मार्ग पर चल रहे हैं। किसी तरह के आडंबर, प्रचार और व्यापार से उनका कोई मतलब नहीं रहता।
ये बातें गुरुवार को पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने अस्सी स्थित दक्षिणामूर्ति पूर्वामनाय मठ में अमर उजाला से बातचीत में कहीं। छह दिवसीय प्रवास के लिए गुरुवार को वाराणसी पहुंचे शंकराचार्य ने कहा कि नीति, आध्यात्म और धर्म के प्रति आस्था के चलते सनातन धर्म का सिद्धांत सर्वोत्कृष्ट है।
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उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद का जो भारत है, वह सनातनी सिद्धांत के अनुसार निर्मित हुआ है। धर्म, संस्कृति से दूर होती नई पीढ़ी के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि माता-पिता को आस्तिक और आशान्वित बनना पड़ेगा।
बच्चों के बिगड़ने के पीछे पालन-पोषण को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को संस्कार और आध्यात्म से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए उन्हें धार्मिक मठों से जोड़ने का आह्वान किया।
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से गंगा की निर्मलता व धर्म से जुड़े अन्य मामलों को लेकर किए जा रहे प्रयासों पर पुरी पीठाधीश्वर ने कुछ भी कहने से मना कर दिया। अंत में उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत जीवन हो या सामाजिक, वैदिक सिद्धांतों का अनुसरण और क्रियान्वयन बहुत जरूरी है।
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राजनीतिक पार्टियां इनका इस्तेमाल करती हैं और जब तालमेल बिगड़ता है तो उनकी सच्चाई सामने आ जाती है। जो संत परंपरा के वाहक हैं, वे बिना विचलित हुए अपने मार्ग पर चल रहे हैं। किसी तरह के आडंबर, प्रचार और व्यापार से उनका कोई मतलब नहीं रहता।
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ये बातें गुरुवार को पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने अस्सी स्थित दक्षिणामूर्ति पूर्वामनाय मठ में अमर उजाला से बातचीत में कहीं। छह दिवसीय प्रवास के लिए गुरुवार को वाराणसी पहुंचे शंकराचार्य ने कहा कि नीति, आध्यात्म और धर्म के प्रति आस्था के चलते सनातन धर्म का सिद्धांत सर्वोत्कृष्ट है।
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उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद का जो भारत है, वह सनातनी सिद्धांत के अनुसार निर्मित हुआ है। धर्म, संस्कृति से दूर होती नई पीढ़ी के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि माता-पिता को आस्तिक और आशान्वित बनना पड़ेगा।
बच्चों के बिगड़ने के पीछे पालन-पोषण को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को संस्कार और आध्यात्म से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए उन्हें धार्मिक मठों से जोड़ने का आह्वान किया।
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से गंगा की निर्मलता व धर्म से जुड़े अन्य मामलों को लेकर किए जा रहे प्रयासों पर पुरी पीठाधीश्वर ने कुछ भी कहने से मना कर दिया। अंत में उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत जीवन हो या सामाजिक, वैदिक सिद्धांतों का अनुसरण और क्रियान्वयन बहुत जरूरी है।