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38 वर्ष पुराने मामले में सजा: 1000 रुपये गबन के दोषी तत्कालीन लेखपाल को तीन साल की कैद, 50 हजार का अर्थदंड भी

Wed, 08 Feb 2023 10:35 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Wed, 08 Feb 2023 10:35 PM IST
सार

38 वर्ष पुराने एक हजार रुपये गबन के मामले में तत्कालीन लेखपाल रमाकांत सिंह (80) को  कोर्ट ने तीन वर्ष की कैद की सजा सुनाई।  इसके साथ ही 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। 

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Punishment in 38 years old case:Three years imprisonment to Lekhpal who convicted in embezzlement
वाराणसी कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भ्रष्टाचार निवारण अवनीश गौतम की कोर्ट ने 38 वर्ष पुराने एक हजार रुपये गबन के मामले में तत्कालीन लेखपाल रमाकांत सिंह (80) को तीन वर्ष की कैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।  एडीजीसी राजीव सिन्हा के मुताबिक बलिया के नगरा थाना क्षेत्र के तियरा निवासी तत्कालीन लेखपाल रमाकांत सिंह पर आरोप था कि वर्ष 1983 में फर्जी हस्ताक्षर कर लाभार्थियों के एक हजार रुपये निकाल लिए।

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कोतवाली में तत्कालीन लेखपाल रमाकांत सिंह, नायाब तहसीलदार अवधेश सिंह के खिलाफ भ्रष्ट्राचार समेत अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया। एडीजीसी राजीव सिन्हा के अनुसार एक गवाह जितेंद्र सिंह का बयान अहम रहा कि उसे पांच सौ रुपये का बंद लिफाफा नहीं मिला और उसका फर्जी हस्ताक्षर कर सरकारी पैसे का गबन कर लिया गया।
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अदालत ने फैसले में कहा कि अभियुक्त पर एक हजार गबन, धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार का आरोप है और अनुचित लाभ लेकर सरकारी पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार किया गया। अदालत ने इन परिस्थितियों में अभियुक्त लेखपाल को दोषी पाया और सजा सुना दी। मामले का निर्णय होने के पहले ही महत्वपूर्ण साक्षियों के साथ एक आरोपी तत्कालीन नायब तहसीलदार अवधेश सिंह की मौत हो चुकी है। 

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अवधेश राय हत्याकांड में रामजी राय का बयान दर्ज

विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए कोर्ट) अवनीश गौतम की अदालत में बुधवार को अवधेश राय हत्याकांड मामले में साक्षी रामजी राय का बयान दर्ज किया गया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी ने बयान दर्ज कराया। इस मामले की अगली सुनवाई अब 14 फरवरी को होगी। 

अभियोजन की ओर से डीजीसी आलोक चंद्र शुक्ला, एडीजीसी विनय कुमार सिंह व वादी के अधिवक्ताओं अनुज यादव व विकास सिंह ने बयान दर्ज होने के बाद साक्षी से जिरह की। अदालत ने अगले सफाई साक्षी के रूप में गोपाल राय को तलब किया है। इससे पहले पूर्व विधायक सिगबतुल्लाह का बयान दर्ज हुआ था।

दरअसल,  तीन अगस्त 1991 को लहुराबीर स्थित आवास के गेट पर ही अवधेश राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अवधेश के भाई अजय राय ने माफिया मुख्तार अंसारी, पूर्व विधायक अब्दुल कलाम, भीम सिंह, कमलेश सिंह व राकेश न्यायिक समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। 

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