पुलवामा के आतंकी हमले में शहीद हुए वाराणसी के सीआरपीएफ जवान रमेश यादव का शव शनिवार को शनिवार सुबह उनके पैतृक गांव तोफापुर पहुंचा। शव पहुँचने के बाद घर में कोहराम मच गया। बेटे का शव देखकर पत्नी, मां और पिता की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। इसी बीच प्रशासन रमेश का शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगा। जिस पर शहीद रमेश के परिवार और प्रशासन के बीच में अंत्येष्टि को लेकर विवाद हो गया। देखें आगे की स्लाइड्स में...
शहीद रमेश के पिता श्यामनारायण यादव ने बताया कि उनका बड़ा बेटा राजेश यादव कर्नाटक से आ रहा है। वह अभी रास्ते में है, उसके आने का इंतजार कर लिजिए। इसके बाद अंतिम संस्कार करा लिजिएगा। लेकिन जिला प्रशासन नहीं माना और पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगा। तोफापुर के ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और जिला प्रशासन मुर्दाबाद का नारा लगाया।
बता दें कि शहीद रमेश के बड़े भाई राजेश यादव कर्नाटक में दूध का व्यवसाय करते हैं। एसडीएम सदर संजीव कुमार ने शुक्रवार को राजेश से बात की तो राजेश ने गोवा तक आने की बात कहीं थी। इस पर एसडीएम सदर ने कहा था कि वहां से आने का इंतज़ाम आपका जिला प्रशासन करेगा। इसके बाद शुक्रवार शाम राजेश गोवा एयरपोर्ट पहुंच गए पर अभी तक उनके वहां से आने की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है और वो एयरपोर्ट के बाहर ही बैठे हुए हैं।
पिता श्यामनारायण ने कहा कि जिला प्रशासन हमारी नहीं सुन रहा है। सब अपनी मर्ज़ी की कर रहा है यहाँ तक की शहीद की पत्नी की भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। परिजनों ने कहा कि जब यही करना था तो शव यहां लाए ही क्यों? श्यामनारायण जिद पर अड़ गए और बोले मैं श्मशान घाट जाऊंगा ही नहीं। इसी बीच सपा जिलाध्यक्ष डॉ. पीयूष यादव पहुंच गए उन्होंने कहा यह मनमानी ठीक नहीं है। परिजनों की राय पर अंतिम संस्कार होना चाहिए।
वहीं, मौके पर पहुंचे मंत्री अनिल राजभर शहीद परिवार को समझाने का प्रयास करने लगे। शहीद का परिवार नहीं माना और अपनी जिद पर अड़ा रहा। इसी बीच जवान रमेश यादव के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा श्रद्धांजलि देने पहुंचे। जहां महेश शर्मा को ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा। इस दौरान जब उनसे जिला प्रशासन की चूक के बारे में बात की गई तो उन्होंने हाथ जोड़ के इसके लिए माफ़ी मांगी और कार्रवाई की बात कही।