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संपूर्णानंद में मनाई गई पं. कमलापति त्रिपाठी की जयंती
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि संस्कृत के बिना भारतीयता की कल्पना नहीं की जा सकती है। काशी की हवा में श्लोक बहते हैं। संस्कृत विश्व की ऐसी भाषा है जिसमें कोई अपवाद नहीं है। हमें संस्कृत का प्रसार तेज करने की जरूरत है। वह शनिवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पाणिनी भवन सभागार में आयोजित पं. कमलापति त्रिपाठी जयंती समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
प्रो. त्यागी ने कहा कि पं. कमलापति त्रिपाठी स्वयं में संस्था थे। उनके योगदान अविस्मरणीय हैं। वे पत्रकार, प्रकांड पंडित एवं कुशल राजनेता के रूप में पूरे देश में स्थापित हैं। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय प्रयागराज के निदेशक प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने कहा कि पं. कमलापति त्रिपाठी संस्कृत और हिंदी भाषा की विशिष्ट ज्ञानराशि को समेटे हुए थे। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि उनके जीवन के कर्मों को आत्मसात करने से जीवन का पथ सरल हो जाएगा।
कार्यक्रम के प्रारंभ में शिक्षण-शोध एवं प्रकाशन संस्थान में स्थापित पंडित कमला पति त्रिपाठी की मूर्ति पर माल्यार्पण तथा परिसर में रुद्राक्ष के पौधे लगाए गए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय वार्ता, वेदांत सूत्रमुक्तावलि, शोधनिबंधावली, भास्करी, महाभाष्ये नवाह्निकस्थ प्रदीपोद्द्योत शब्दकौस्तुभानां समीक्षात्मकमध्ययन: पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। इस दौरान डॉ. पद्माकर मिश्र, डॉ. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. सदानंद शुक्ल, प्रो. हेतराम, प्रो. सुधाकर मिश्र आदि मौजूद रहे।
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प्रो. त्यागी ने कहा कि पं. कमलापति त्रिपाठी स्वयं में संस्था थे। उनके योगदान अविस्मरणीय हैं। वे पत्रकार, प्रकांड पंडित एवं कुशल राजनेता के रूप में पूरे देश में स्थापित हैं। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय प्रयागराज के निदेशक प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने कहा कि पं. कमलापति त्रिपाठी संस्कृत और हिंदी भाषा की विशिष्ट ज्ञानराशि को समेटे हुए थे। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि उनके जीवन के कर्मों को आत्मसात करने से जीवन का पथ सरल हो जाएगा।
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कार्यक्रम के प्रारंभ में शिक्षण-शोध एवं प्रकाशन संस्थान में स्थापित पंडित कमला पति त्रिपाठी की मूर्ति पर माल्यार्पण तथा परिसर में रुद्राक्ष के पौधे लगाए गए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय वार्ता, वेदांत सूत्रमुक्तावलि, शोधनिबंधावली, भास्करी, महाभाष्ये नवाह्निकस्थ प्रदीपोद्द्योत शब्दकौस्तुभानां समीक्षात्मकमध्ययन: पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। इस दौरान डॉ. पद्माकर मिश्र, डॉ. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. सदानंद शुक्ल, प्रो. हेतराम, प्रो. सुधाकर मिश्र आदि मौजूद रहे।
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