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निषेधाज्ञा तोड़ निकाली पदयात्रा
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 02 Oct 2015 02:26 AM IST
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लाठीचार्ज के विरोध में पहली बार गुरुवार को संतों-भक्तों ने निषेधाज्ञा तोड़कर काशी की सड़कों पर धर्म रक्षा संकल्प यात्रा निकाली। टाउनहाल से दशाश्वमेध घाट तक निकली इस यात्रा में शामिल सैकड़ों की तादाद में झंडे-बैनर के साथ निकले लोगों ने सरकार विरोधी नारे लगाए। दशाश्वमेध घाट पर आचमन कर संतों ने गंगा में ही प्रतिमाओं के विसर्जन का संकल्प लिया।
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उधर, जिला प्रशासन प्रतिमा विसर्जन के लिए वैकल्पिक कुंड तैयार कराने में जुटा है। साथ ही कोशिश की जा रही है कि इसके लिए संतों को भी राजी कर लिया जाए। शहर के प्रबुद्धजनों ने भी गंगा में मूर्ति विसर्जन के मसले पर प्रशासन से बीच का रास्ता निकालने की बात कही। साथ ही, गंगा में मूर्तियों के विसर्जन पर रोक के कोर्ट के फैसले को गंगा के हित में बताया।
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टाउनहाल से दोपहर बाद पौने तीन बजे पातालपुरी पीठ के महंत बालक दास, महामंडलेश्वर संतोष दास और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रतिनिधि ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद की अगुवाई में धर्म रक्षा संकल्प यात्रा निकली। साधु-संतों का अपमान-नहीं सहेगा हिंदुस्तान जैसे नारे लगाते हुए सैकड़ों भक्त भी संतों के साथ सड़क पर उतरे।
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मैदागिन चौराहे से बुलानाला, नीचीबाग पहुंचने पर श्रीकाशी मराठा गणेश उत्सव सेवा समिति के कार्यकर्ता इस यात्रा में शामिल हुए। गोदौलिया चौराहे पर यात्रा में शामिल हिंदु युवा वाहिनी के कुछ कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए और लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार अफसरों को बर्खास्त करने की मांग करने लगे।
इसके बाद प्रदर्शनकारियों का हुजूम सीधे दशाश्वमेध घाट पहुंचा। वहां संतों ने गंगा में आचमन कर संकल्प लिया कि किसी भी दशा में विसर्जन की परंपरा टूटने नहीं दी जाएगी। पांच अक्तूबर को मैदागिन से निकलने वाली अन्याय प्रतिकार यात्रा को सफल बनाने के लिए संतों ने लोगों को घर-घर से निकलने की अपील की।