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Varanasi News: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की संबद्धता की प्रक्रिया करें ऑनलाइन
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्धता की प्रक्रिया जल्द ही ऑनलाइन की जाएगी। अपर मुख्य सचिव डॉ. सुधीर एम बोबड़े ने निरीक्षण के दौरान यह निर्देश दिया। संबद्धता ऑनलाइन होने से प्राच्य विद्या की ज्ञान राशि का प्रसार वैश्विक हो जाएगा। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा डॉ. बोबड़े ने बुधवार को विश्वविद्यालय का निरीक्षण किया और समीक्षा के बाद जरूरी निर्देश भी दिए। कहा कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने से लाभ होगा। पुस्तकालय में इंटर्नशिप पर कार्य करने वालों को रखा जाए। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में बैठक के दौरान डॉ. बोबड़े ने रिक्त शिक्षकों के पदों को जल्द से जल्द भरने का निर्देश दिया। अपर मुख्य सचिव ने शताब्दी भवन के अतिथि भवन को आधुनिक रूप में तैयार करने का निर्देश दिया। मुख्य भवन की स्वच्छता पर संतोष व्यक्त करते हुए संग्रहालय को मुख्य भवन में स्थापित करने को कहा। अप्रैल में हुई समीक्षा बैठक के बिंदुओं की भी जांच की और संबंधित अधिकारियों को स्वच्छता की गति को और आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने विस्तार भवन, श्रमण विद्या संकाय, विदेशी छात्रावास, दलाई लामा कक्ष, परीक्षा भवन, मुख्य और अन्य भवन में स्वच्छता अभियान को परखा। डॉ. बोबड़े ने वाईफाई की स्पीड, सीसी कैमरे के साथ ही रुसा संबंधित बजट एवं जेम पोर्टल की समीक्षा कर दिशा-निर्देश दिया। कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने अपर मुख्य सचिव का स्वागत किया। कुलसचिव प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, विनयाधिकारी प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. ज्ञान प्रकाश, वित्त अधिकारी जनार्दन पांडेय, प्रो. राजनाथ, उपकुलसचिव केसलाल, सहायक अभियंता रामविजय सिंह उपस्थित थे।
पांडुलिपियों काे किया जाएगा डिजिटल
वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में निरीक्षण के दौरान अपर मुख्य सचिव डॉ. सुधीर एम बोबड़े ने सरस्वती भवन में रखी 96 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों को देखा और इसे जल्द से जल्द डिजिटल स्वरूप देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय की यह अमूल्य निधि है। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य राशि है। इसके संरक्षण के संपूर्ण प्रयास करने की जरुरत है। प्रदेश सरकार भी सहयोग करती रहेगी।
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