आजमगढ़ में जनाधार खो चुकी कांग्रेस के लिए प्रियंका गांधी का दौरा दे गया संजीवनी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़ जिले के बिलरियागंज घटना पीड़ितों से मिलने के बहाने जनपद पहुंची प्रियंका जनपद की राजनीतिक हलचल को तेज कर चुकी हैं। जनपद में जिस तरह से जगह-जगह उनके स्वागत में लोग उमड़े, उसने कांग्रेस को एकबार फिर से चर्चा में लौटा दिया है। लेकिन जिले के कांग्रेसी नेताओं का मानना है कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। इतना जरूर है कि आज हम लोगों के बीच चर्चा में हैं। वहीं सपा भी अपने मुखिया के आने की बात कहने लगी है, लेकिन अभी इसकी तिथि निर्धारित नहीं हुई है।
जनपद में अपना जनाधार खो चुकी कांग्रेस अपने अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी। विगत कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का जनपद में खाता भी नहीं मिला। संभवतः स्व. रामनरेश यादव कांग्रेस पार्टी के जिले से आखिरी विधायक हुए थे। इसके बाद किसी को भी विधायक बनने का मौका नहीं मिला और जनपद में सपा और बसपा जैसे क्षेत्रीय दल सभी सीटों पर हावी होते गए।
बीच-बीच में भाजपा ने एकाध सीटों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कांग्रेस का जनाधार भी घटता चला गया। पार्टी में भी गुटबाजी चरम पर थी। इस गुटबाजी का परिणाम रहा कि जिले में पार्टी कमजोर होती गई। एक बार फिर से अपने पैरों पर खड़ी होने की कोशिश में जुटी कांग्रेस पार्टी को अपने राष्ट्रीय महासचिव से बहुत उम्मीदें हैं।
बुधवार को बिलरियागंज घटना के पीड़ितों से मिलने के लिए जब प्रियंका गांधी वाड्रा ने जौनपुर की सीमा से जनपद में प्रवेश किया तो जगह-जगह-जगह जिस तरह से लोगों ने उनका स्वागत किया उसने इस बात को साबित कर दिया कि कांग्रेस को प्रियंका से जो उम्मीद हैं वह ऐसे ही नहीं है। प्रियंका में वह जज्बा है कि वह पार्टी को फिर से खड़ा कर सकती है।
बिलरियागंज में पीड़ित महिलाओं से मिलकर जब प्रियंका बाहर निकलीं तो बाहर लोग नारेबाजी करने लगे। उनके पीछे अहाते से निकली पीड़ित महिलाएं भी उनसे काफी प्रभावित नजर आईं और लोगों के साथ उन्होंने भी प्रियंका के समर्थन में नारे लगाए। इस दौरान बिलरियागंज में उमड़े हुजूम ने विपक्षी दलों को सोचने के लिए विवश कर दिया है।
इस छोटे से कार्यक्रम के जरिए प्रियंका जहां जनपद में कांग्रेस पार्टी को संजीवनी देकर उसे चर्चाओं में खड़ा कर गईं। वहीं अन्य राजनीतिक दलों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गईं। सपा की मानें तो भीड़ से कुछ अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। क्योंकि भी दो तरह की होती है। एक जो तमाशबीन होती है दूसरी जो उससे प्रभावित होकर आती है। इसलिए भीड़ से कोई राजनैतिक अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।
सपा और कांग्रेस के अलग हैं विचार
इस बात को लेकर सपा और कांग्रेस के विचार अलग-अलग हैं। सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा कि बिलरियागंज में मुस्लिम महिलाओं ने प्रियंका के समर्थन में जो नारा लगाया वह अलग बात है। लेकिन मुस्लिम समुदाय जानता है कि आजादी के बाद उनके साथ जो जुल्म और ज्यादती हुई है। उसमें सबसे ज्यादा कांग्रेस का कार्यकाल था।
कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण दंगे हुए और नौकरियों में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी कम हुई। अखिलेश यादव के जनपद आगमन के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह अखिलेश यादव का संसदीय क्षेत्र है। वह जरूर आएंगे लेकिन इसकी तिथि वहीं निर्धारित करेंगे। वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रवीण सिंह का कहना है कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
क्योंकि यह कार्यक्रम कोई राजनैतिक कार्यक्रम नहीं था। प्रियंका जी की ओर से निर्देश नहीं था कि कोई होर्डिंग नहीं लगेगी और ना ही कांग्रेस के समर्थन में नारा लगेगा। लेकिन उनकी सक्रियता से कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है। काफी दिनों से जिले की जो राजनीति सपा और बसपा के ईर्द गिर्द घूम रही थी, उनके आने से कांग्रेस पार्टी भी चर्चा में आ गई है।