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हत्या के आरोपी बंदी ने जेल में फांसी लगाकर की आत्महत्या, मचा हड़कंप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Thu, 01 Feb 2018 11:34 PM IST
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : demo
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यूपी के आजमगढ़ स्थित जेल में गुरुवार की देर शाम बंदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जेल के अंदर आत्महत्या किए जाने की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन के साथ ही पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया। आत्महत्या करने वाला बंदी हत्या के आरोप में बीते पांच माह से निरुद्ध था। भोजन बनाने के लिए उसकी ड्यूटी लगाई गई थी।
जेल के अधिकारियों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची सिधारी थाने की पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस जेल के अधिकारियों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बीते हफ्ते बंदी रक्षक को गोली मारने का मामला अभी शांत भी नहीं हो पाया था कि गुरुवार की देर शाम हुई घटना ने फिर से सबको सकते में डाल दिया।
जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम के मुताबिक मृत बंदी विनोद कुमार (38) बिलरियागंज थाना क्षेत्र के सियरहा गांव का निवासी था। बैरक नंबर पांच सी में निरुद्ध विनोद को जेल के बंदियों को भोजन बनाने के लिए भोजनालय में लगाया गया था।
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गुरुवार की शाम साढ़े पांच बजे भोजनालय बंद हो गया। इसके बाद सभी बंदी हाते में चले गए। शाम सात बजे बंदियों को उनके बैरक में बंद करने का काम शुरू हुआ। इस दौरान विनोद नहीं मिला। विनोद के न मिलने पर उसकी खोजबीन शुरू हुई।
काफी तलाश के बाद बंदी रक्षकों ने विनोद की लाश बैरक के पीछे छत से लगे हुक से लटकती हुई दिखी। विनोद को फांसी लगाकर आत्महत्या करने की घटना के बाद हड़कंप मच गया। जेल के अधिकारियों ने घटना के संबंध में पुलिस को सूचना दी। सीओ सिटी सच्चिदानंद ने बताया कि पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही है।
जेल के अधिकारियों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची सिधारी थाने की पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस जेल के अधिकारियों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बीते हफ्ते बंदी रक्षक को गोली मारने का मामला अभी शांत भी नहीं हो पाया था कि गुरुवार की देर शाम हुई घटना ने फिर से सबको सकते में डाल दिया।
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जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम के मुताबिक मृत बंदी विनोद कुमार (38) बिलरियागंज थाना क्षेत्र के सियरहा गांव का निवासी था। बैरक नंबर पांच सी में निरुद्ध विनोद को जेल के बंदियों को भोजन बनाने के लिए भोजनालय में लगाया गया था।
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गुरुवार की शाम साढ़े पांच बजे भोजनालय बंद हो गया। इसके बाद सभी बंदी हाते में चले गए। शाम सात बजे बंदियों को उनके बैरक में बंद करने का काम शुरू हुआ। इस दौरान विनोद नहीं मिला। विनोद के न मिलने पर उसकी खोजबीन शुरू हुई।
काफी तलाश के बाद बंदी रक्षकों ने विनोद की लाश बैरक के पीछे छत से लगे हुक से लटकती हुई दिखी। विनोद को फांसी लगाकर आत्महत्या करने की घटना के बाद हड़कंप मच गया। जेल के अधिकारियों ने घटना के संबंध में पुलिस को सूचना दी। सीओ सिटी सच्चिदानंद ने बताया कि पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही है।
पत्नी की गला दबा कर हत्या करने के बाद नदी में फेंक दी थी लाश
बेकारी से परेशान था विनोद
- फोटो : demo pic
आजमगढ़ जिला जेल में गुरुवार की शाम फांसी लगाकर आत्महत्या करने वाला विनोद कुमार बेरोजगारी से परेशान था। इसी के चलते 27 जुलाई 2017 की शाम उसने अपनी पत्नी माया देवी का गला दबाकर हत्या कर दी थी और उसकी लाश निजामाबाद थाना क्षेत्र के भदुली पुल से तमसा नदी में फेंक दिया।
उसके तीनों बच्चों ने शिबली गांव स्थित ननिहाल पहुंचकर पूरा घटनाक्त्रस्म बताया तो लोग मौके पर पहुंचे तब तक माया मर चुकी थी। जबकि विनोद वहीं नदी के किनारे बैठकर रो रहा था। अर्जुन राम के तीन बेटों में सबसे बड़े विनोद कुमार और माया देवी दोनों की यह दूसरी शादी हुई थी।
घर से हक हिस्सा नहीं मिलने पर वह शिबली गांव स्थित अपनी ससुराल में रह रहा था। पिता के हाथों मां पहले ही मर चुकी थी। आज पिता के भी मर जाने के बाद उसके तीनों बच्चे अनाथ हो गये। ननिहाल वाले ही अब इनका सहारा हैं।
उसके तीनों बच्चों ने शिबली गांव स्थित ननिहाल पहुंचकर पूरा घटनाक्त्रस्म बताया तो लोग मौके पर पहुंचे तब तक माया मर चुकी थी। जबकि विनोद वहीं नदी के किनारे बैठकर रो रहा था। अर्जुन राम के तीन बेटों में सबसे बड़े विनोद कुमार और माया देवी दोनों की यह दूसरी शादी हुई थी।
घर से हक हिस्सा नहीं मिलने पर वह शिबली गांव स्थित अपनी ससुराल में रह रहा था। पिता के हाथों मां पहले ही मर चुकी थी। आज पिता के भी मर जाने के बाद उसके तीनों बच्चे अनाथ हो गये। ननिहाल वाले ही अब इनका सहारा हैं।