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वाराणसी दौरे में प्रधानमंत्री मोदी बीएचयू को देंगे तीन तोहफे
amarujala.com, written by रबीश श्रीवास्तव
Updated Fri, 15 Sep 2017 09:07 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 सितंबर को अपने प्रस्तावित बनारस आगमन पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) को तीन सौगातें देंगे। दो बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे और एक का शिलान्यास। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं।
मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र और चाणक्य सभागार लोकार्पण के लिए पूरी तरह तैयार है। वैदिक विज्ञान केंद्र की आधारशिला रखने की भी सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं।
महामना की तपोभूमि से प्रधानमंत्री के खास लगाव को देखते हुए संभावना यह भी जताई जा रही है कि दो दिनी प्रवास के दौरान वह बीएचयू के एलडी गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम कर सकते हैं। हालांकि अभी इस बारे में कोई अधिकृत सूचना नहीं है। प्रधानमंत्री कार्यालय और एसपीजी की ओर से प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों की सूची फाइनल की जाएगी।
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मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र महामना के सपनों को साकार करने में अपनी अहम भूमिका निभाएगा। केंद्र के जरिए न सिर्फ महामना के व्यक्तित्व और कृतित्व का प्रचार-प्रसार होगा बल्कि व्याख्यान, गोष्ठी, चर्चा-परिचर्चा के जरिए महामना के उद्देश्यों को फलीभूत करने की वैचारिक जमीन तैयार होगी।
महामना के विचारों, उद्देश्यों को लिपिबद्ध कराया जाएगा। केंद्र में इस पर डिप्लोमा कोर्स भी संचालित होगा। वहीं, शिक्षा संकाय में नवनिर्मित चाणक्य सभागार कैंपस के स्वतंत्रता भवन के बाद दूसरा ऐसा सभागार है जो दो मंजिला है। 50 सीट का अलग सिनेट हॉल भी बना है।
जिस वैदिक विज्ञान केंद्र की आधारशिला प्रधानमंत्री रखेंगे, वह अपने आप में दुनिया का अनूठा केंद्र होगा, जो आधुनिक वैज्ञानिक संदर्भों में प्राच्य एवं वैदिक ज्ञान-विज्ञान के पठन-पाठन और अनुसंधान के लिए समर्पित होगा।
प्रधानमंत्री के आगमन में हफ्ते भर का समय रह गया है, लिहाजा विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास की तैयारियां तेज कर दी हैं। विश्वविद्यालय परिवार प्रधानमंत्री की ओर से मिलने वाली इन तीन सौगातों को लेकर बेहद उत्साहित है।
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मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र और चाणक्य सभागार लोकार्पण के लिए पूरी तरह तैयार है। वैदिक विज्ञान केंद्र की आधारशिला रखने की भी सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं।
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महामना की तपोभूमि से प्रधानमंत्री के खास लगाव को देखते हुए संभावना यह भी जताई जा रही है कि दो दिनी प्रवास के दौरान वह बीएचयू के एलडी गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम कर सकते हैं। हालांकि अभी इस बारे में कोई अधिकृत सूचना नहीं है। प्रधानमंत्री कार्यालय और एसपीजी की ओर से प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों की सूची फाइनल की जाएगी।
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मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र महामना के सपनों को साकार करने में अपनी अहम भूमिका निभाएगा। केंद्र के जरिए न सिर्फ महामना के व्यक्तित्व और कृतित्व का प्रचार-प्रसार होगा बल्कि व्याख्यान, गोष्ठी, चर्चा-परिचर्चा के जरिए महामना के उद्देश्यों को फलीभूत करने की वैचारिक जमीन तैयार होगी।
महामना के विचारों, उद्देश्यों को लिपिबद्ध कराया जाएगा। केंद्र में इस पर डिप्लोमा कोर्स भी संचालित होगा। वहीं, शिक्षा संकाय में नवनिर्मित चाणक्य सभागार कैंपस के स्वतंत्रता भवन के बाद दूसरा ऐसा सभागार है जो दो मंजिला है। 50 सीट का अलग सिनेट हॉल भी बना है।
जिस वैदिक विज्ञान केंद्र की आधारशिला प्रधानमंत्री रखेंगे, वह अपने आप में दुनिया का अनूठा केंद्र होगा, जो आधुनिक वैज्ञानिक संदर्भों में प्राच्य एवं वैदिक ज्ञान-विज्ञान के पठन-पाठन और अनुसंधान के लिए समर्पित होगा।
प्रधानमंत्री के आगमन में हफ्ते भर का समय रह गया है, लिहाजा विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास की तैयारियां तेज कर दी हैं। विश्वविद्यालय परिवार प्रधानमंत्री की ओर से मिलने वाली इन तीन सौगातों को लेकर बेहद उत्साहित है।
ये हैं वो सौगातें
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र
तीन मंजिला इस केंद्र में क्लास रूम के साथ ही 220 सीट का सभागार है। मालवीय अभिलेखागार के लिए कमरा और खुला मंच। 50 सीट का कांफ्रेंस रूम और लाइब्रेरी।
चाणक्य सभागार
शिक्षा संकाय में बना यह सभागार कैंपस का अनूठा सभागार है। स्वतंत्रता भवन के बाद कैंपस का दूसरा दो मंजिला सभागार। 620 लोगों के बैठने की क्षमता। 50 सीट का सीनेट हाल भी।
वैदिक विज्ञान केंद्र
प्राचीन ज्ञान-विज्ञान को नए वैज्ञानिक संदर्भों, अर्थों में सामने लाया जाएगा। ज्योतिष और वैदिक ज्ञान के अध्ययन, अनुसंधान के क्षेत्र में यह अंतरराष्ट्रीय नोडल केंद्र के रूप में कार्य करेगा। वैदिक ज्ञान विज्ञान पर आधुनिक वैज्ञानिक संदर्भों में शोध कार्य, ग्रंथों का प्रकाशन, दुर्लभ पांडुलिपियों, ग्रंथों का संग्रह एवं अध्ययन, वैदिक वाचिक परंपरा और वैदिक यज्ञ अनुष्ठान। प्राच्य ज्ञान-विज्ञान के जरिए आधुनिक वैज्ञानिक संदर्भों में समसामयिक समस्याओं के समाधान भी सुझाए जाएंगे।
तीन मंजिला इस केंद्र में क्लास रूम के साथ ही 220 सीट का सभागार है। मालवीय अभिलेखागार के लिए कमरा और खुला मंच। 50 सीट का कांफ्रेंस रूम और लाइब्रेरी।
चाणक्य सभागार
शिक्षा संकाय में बना यह सभागार कैंपस का अनूठा सभागार है। स्वतंत्रता भवन के बाद कैंपस का दूसरा दो मंजिला सभागार। 620 लोगों के बैठने की क्षमता। 50 सीट का सीनेट हाल भी।
वैदिक विज्ञान केंद्र
प्राचीन ज्ञान-विज्ञान को नए वैज्ञानिक संदर्भों, अर्थों में सामने लाया जाएगा। ज्योतिष और वैदिक ज्ञान के अध्ययन, अनुसंधान के क्षेत्र में यह अंतरराष्ट्रीय नोडल केंद्र के रूप में कार्य करेगा। वैदिक ज्ञान विज्ञान पर आधुनिक वैज्ञानिक संदर्भों में शोध कार्य, ग्रंथों का प्रकाशन, दुर्लभ पांडुलिपियों, ग्रंथों का संग्रह एवं अध्ययन, वैदिक वाचिक परंपरा और वैदिक यज्ञ अनुष्ठान। प्राच्य ज्ञान-विज्ञान के जरिए आधुनिक वैज्ञानिक संदर्भों में समसामयिक समस्याओं के समाधान भी सुझाए जाएंगे।